श्रावस्ती में धान पर भूरा फुदका और गंधी बग का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की सलाह
05 अक्टूबर 2026, श्रावस्ती (उत्तर प्रदेश): श्रावस्ती में धान पर भूरा फुदका और गंधी बग का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की सलाह – श्रावस्ती जिले में धान की खड़ी फसल पर भूरा फुदका और गंधी बग कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी नत्थू लाल ने किसानों के लिए दवा के नाम और मात्रा के साथ विस्तृत सलाह जारी की है।
पौधों को जड़ से सुखाने वाला भूरा फुदका
भूरा फुदका कीट धान के तने के पास चिपककर रस चूसता है, जिससे पूरा पौधा सूख जाता है और खेत दूर से जला हुआ दिखने लगता है। यह कीट खासतौर पर घनी बुवाई वाले और ज्यादा नाइट्रोजन खाद डाले गए खेतों में तेजी से फैलता है, क्योंकि ऐसे खेतों में पौधों के बीच हवा कम आ-जा पाती है।
कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक प्रकोप दिखते ही खेत में यूरिया का इस्तेमाल रोक देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा नाइट्रोजन कीट को और तेजी से बढ़ने में मदद करता है। साथ ही खेत में पानी का जमाव भी कम रखने की सलाह दी गई है।
नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% की 50 मिलीलीटर मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके विकल्प के तौर पर थायामेथोक्साम 25% की 40 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल की जा सकती है। छिड़काव करते समय दवा का घोल सीधे पौधे के तने के निचले हिस्से पर पड़े, इस बात का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि कीट ज्यादातर वहीं छिपा रहता है।
बालियों का रस चूसकर दाना खराब करता गंधी बग
गंधी बग कीट धान की बालियों से रस चूसता है, जिससे दाने ठीक से नहीं बन पाते और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। यह कीट खासतौर पर बालियों के निकलने के समय सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इस अवस्था में खेत की नियमित निगरानी जरूरी बताई गई है।
इसके नियंत्रण के लिए मिथाइल पैराथियान 5% धूल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा फेनवेलरेट 0.4% की 25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से धूल के रूप में इस्तेमाल करने का विकल्प भी बताया गया है। धूल का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना ज्यादा असरदार रहता है, जब हवा कम चलती है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपने खेत की नियमित निगरानी करने और प्रकोप के शुरुआती लक्षण दिखते ही छिड़काव करने को कहा है, ताकि कीट पूरे खेत में फैलने से पहले ही नियंत्रित हो जाए।
भूरा फुदका और गंधी बग दोनों ही कीट धान उगाने वाले ज्यादातर राज्यों में हर साल खरीफ सीजन में किसानों के लिए चिंता का विषय बनते हैं। कृषि वैज्ञानिक सिर्फ रासायनिक छिड़काव पर निर्भर रहने के बजाय खेत की निगरानी के कुछ पुराने और भरोसेमंद तरीकों को भी अपनाने की सलाह देते हैं।
इनमें खेत में समय-समय पर पौधों के आधार को हल्के से हिलाकर देखना शामिल है, जिससे भूरा फुदका कीट की मौजूदगी का शुरुआती पता चल जाता है। इसके अलावा खेत की मेड़ों और आसपास की घास-फूस को साफ रखना भी जरूरी बताया जाता है, क्योंकि कीट अक्सर वहीं छिपकर अंडे देते हैं।
मकड़ी और कुछ मित्र कीट जैसे मिरिड बग स्वाभाविक रूप से भूरा फुदका के अंडे और बच्चों को खाते हैं, इसलिए बहुत जरूरी न हो तो लगातार कीटनाशक छिड़काव से बचने की सलाह भी दी जाती है, ताकि ये मित्र कीट खेत में बचे रहें और प्रकोप को प्राकृतिक रूप से कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद करें।
जिन किसानों को अपनी फसल में कीट या रोग की समस्या समझ न आए, वे खेत और पौधे की फोटो खींचकर 9452247111 या 9452257111 नंबर पर एसएमएस या व्हाट्सऐप कर सकते हैं। कृषि विभाग के मुताबिक ऐसी शिकायतों का जवाब 48 घंटे के भीतर दिया जाता है।
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