रायपुर: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बदली किसान की राह, कोलकाता तक पहुंची उपज; ₹38/kg तक मिल रहा भाव
06 अक्टूबर 2026, रायपुर: रायपुर: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बदली किसान की राह, कोलकाता तक पहुंची उपज; ₹38/kg तक मिल रहा भाव – खेती में आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और बेहतर बाजार से जुड़ाव किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने के नए अवसर तैयार कर रहा है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम बटईकेला निवासी किसान हरिहर साय ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को व्यावसायिक रूप देकर अपनी उपज के लिए स्थानीय बाजार से आगे कोलकाता तक बाजार तैयार किया है। 30 सितंबर 2026 तक वे 19.50 क्विंटल बैंगन बेच चुके हैं। उन्हें अलग-अलग समय पर बैंगन का भाव 27 से 38 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिला है।
0.40 हेक्टेयर में शुरू की ग्राफ्टेड बैंगन की खेती
हरिहर साय के पास कुल 4 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की है। इस वर्ष उन्होंने वीएनआर-212 ग्राफ्टेड बैंगन की खेती का चयन किया। फसल की बुआई 15 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद 27 जुलाई से पहली तुड़ाई और बिक्री शुरू हुई। ग्राफ्टेड पौधों के साथ फसल प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान देते हुए उन्होंने बैंगन की खेती को बाजार की मांग से जोड़ा। फसल की तुड़ाई और बिक्री अभी भी जारी है।
बटईकेला से कोलकाता तक पहुंची उपज
हरिहर साय के खेत में तैयार बैंगन अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। उनकी उपज पश्चिम बंगाल के कोलकाता बाजार में भी बेची जा रही है। 30 सितंबर 2026 तक 19.50 क्विंटल बैंगन की बिक्री हो चुकी है। अलग-अलग समय पर उन्हें 27 रुपये से 38 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भाव मिला। चूंकि बैंगन की तुड़ाई और बिक्री अभी जारी है, इसलिए आगे कुल उत्पादन और इससे प्राप्त होने वाली आय में और बढ़ोतरी हो सकती है। बेहतर गुणवत्ता वाली उपज और बाजार से सीधे जुड़ाव ने किसान को अपनी फसल के लिए स्थानीय बाजार से आगे एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराने में मदद की है।
एक फसल पर निर्भरता के बजाय अपनाया विविधीकरण
हरिहर साय ने अपनी खेती को सिर्फ बैंगन तक सीमित नहीं रखा है। वे उद्यानिकी क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाते हुए शेडनेट हाउस में वीएनआर करेला और वीएनआर मिर्च के बीज उत्पादन का काम भी कर रहे हैं। अलग-अलग उद्यानिकी गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने खेती में आय के कई अवसर तैयार किए हैं। उनका यह प्रयास बताता है कि उपलब्ध कृषि भूमि का योजनाबद्ध उपयोग कर विभिन्न फसलों और कृषि गतिविधियों को अपनाया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक और बाजार से बढ़े अवसर
हरिहर साय की खेती यह दिखाती है कि परंपरागत खेती के साथ उन्नत पौध सामग्री, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और बेहतर बाजार से जुड़ाव किसानों के लिए नए अवसर तैयार कर सकता है। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के साथ करेला और मिर्च के बीज उत्पादन से जुड़कर उन्होंने फसल विविधीकरण को अपनाया है। वहीं, बटईकेला से कोलकाता तक उनकी उपज का पहुंचना यह बताता है कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बड़े बाजार से जोड़कर किसान अपनी खेती के लिए नए बाजार तलाश सकते हैं।
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