पांढुर्ना: प्राकृतिक हाट बाजार से जैविक उत्पादों के उपयोग की अपील
15 फरवरी 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना): पांढुर्ना: प्राकृतिक हाट बाजार से जैविक उत्पादों के उपयोग की अपील – साप्ताहिक प्राकृतिक हाट बाजार जो हर गुरुवार को पांढुर्णा में लगता है, में इस सप्ताह विशेष गतिविधि देखने को मिली। कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देशानुसार नागरिकों के साथ-साथ आज संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मेघा शर्मा, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रेक्षा पाठक एवं जनपद पंचायत सीईओ श्रीमती बंदू सूर्यवंशी ने बाजार पहुंचकर जैविक उत्पादों की खरीदी की।
इस अवसर पर जनपद पंचायत सीईओ श्रीमती बंदू सूर्यवंशी ने जैविक खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैविक फसलें हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है। खेती में रसायनों का उपयोग होने से फल और सब्जियां सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। आपने नागरिकों को रसायन युक्त सब्जियां छोड़कर जैविक पदार्थों का अधिक उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पाद न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिला प्रशासन द्वारा साप्ताहिक जैविक हाट बाज़ार शुरू करने का अच्छा प्रयास किया गया है। जहाँ जैविक सब्जियां , जैविक आटा, सूजी , दालें मिल रही है। शहरवासियों से अनुरोध है कि अधिकतम लोग इस हाट बाज़ार में आएं और इन्हें खरीदें। साप्ताहिक प्राकृतिक हाट बाजार में स्व सहायता समूहों द्वारा भी उत्पाद लाए गए हैं। इस पर श्रीमती सूर्यवंशी ने कहा कि स्व सहायता समूहों को हम प्रोत्साहित कर रहे हैं कि जो सामग्री घर में बनाकर केवल गांवों तक सीमित है , उनको शहर में लाकर लोगों तक लाभ पहुंचाएं। आज से शुरुआत की है। इनके द्वारा दालें , ज्वार , मक्का का आटा बनाकर लाया गया है। आगे से इसे निरंतर किया जाएगा।
हाट बाजार में स्वयं सहायता समूह “जय माँ सरस्वती” द्वारा विभिन्न जैविक उत्पाद बिक्री के लिए लाए गए। स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष वंदना कुमरे ने बताया कि जैविक फसलों का आटा घर पर चक्की पर पीसकर लाया गया है, जिसमें ज्वार, बाजरा, गेहूं इत्यादि उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन की आम जनता से अपील है कि अधिक से अधिक जैविक पदार्थों का उपयोग करें तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में अपना योगदान दें। इस मौके पर कृषि विभाग सौंसर से श्री हेमेंद्र माटे,कृषि विभाग पांढुर्ना से सुश्री शिवानी उइके और श्री राहुल सरयाम भी मौजूद थे।
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