मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का फरमान
कृषि फीडर पर एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा सप्लाई तो कटेगा कर्मचारी का वेतन
मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना, अफसरो की मनमानी
05 नवंबर 2025, भोपाल: मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का फरमान – प्रदेश सरकार जहां एक ओर किसान हितैषी नीतियां बनाकर किसानों को राहत देने में जुटी है। वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनियों के अफसर मनमानी बिजली कटौती पर आमादा नजर आ रहे हैं। इससे सरकार की घोषणाओं और किसान हितैषी नीतियां कठघरे में नजर आ रही हैं। हाल ही में ऊर्जा विभाग की समाधान योजना की शुरुआत करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की थी कि इस योजना में तीन माह या उससे अधिक समय से बिल बकाया रखने वाले घरेलू, गैर घरेलू ,कृषि तथा औद्योगिक उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट प्रदान की जाएगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “समाधान योजना’ 2025-26” से प्रदेश के 90 लाख उपभोक्ताओं का 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक बिजली बिल पर सरचार्ज माफ किया जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार संकल्पित है। वहीं सीएम की उक्त घोषणा के बाद बिजली विभाग के आदेश ने किसानों की नींद उड़ा दी है। विद्युत कंपनी ने आदेश जारी किया है कि किसी महीने में किसी भी कृषि फीडर पर एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा बिजली की सप्लाई नहीं करनी है। ऐसा पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी का वेतन काट दिया जाएगा। ये आदेश मध्य क्षेत्र विद्युत मंडल कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर श्री ए के जैन ने निकाला है ।बेमौसम बारिश से पहले ही किसान अपनी फसलों के नुकसान से परेशान थे, अब बिजली विभाग ने उन पर एक और बोझ डाल दिया है। इस आदेश के बाद किसानों में आक्रोश फैल गया है। विपक्ष ने इसे सरकार का”दोहरा रवैया”बतायाहै ,सियासत गर्मा गई है ।
तुगलकी फरमान
मध्य क्षेत्र विद्युत मंडल कंपनी के आदेश में कहा गया है कि यदि किसी कृषि फीडर पर निर्धारित 10 घंटे से अधिक बिजली दी जाती है तो इसे नियम के खिलाफ माना जाएगा और संबंधित आपरेटर की एक दिन की सैलरी काटी जाएगी। यदि कंट्रोल रूम द्वारा किसी कृषि फीडर पर 2 दिन लगातार 10 घंटे से अधिक बिजली दी जाती है तो संबंधित जूनियर इंजीनियर का एक दिन का वेतन काटा जाएगा। लगातार 5 दिन तक ऐसा होने पर डीजी एम् की 1 दिन की सैलरी काटी जाएगी। यदि 7 दिन तक प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक आपूर्ति पाई जाती है, तो महाप्रबंधक का एक दिन का वेतन काटा जाएगा। मध्य क्षेत्र विद्युत मंडल कंपनी ने उक्त आदेश भोपाल और ग्वालियर के साथ सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, रायसेन, हरदा, विदिशा, दतिया अशोकनगर, गुना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी और मुरैना के महाप्रबंधकों को भेजा है।
आदेश में क्या कहा गया कि यदि कहीं मिट्टी की नमी, खराब मौसम या तकनीकी कारणों से लोड बढ़ता है तो भी आपूर्ति 10 घंटे से अधिक नहीं की जानी चाहिए। कृषि फीडर मीटरों के समय रीडिंग के आधार पर प्रतिदिन 15 मिनट तक की त्रुटि सीमा निर्धारित की गई है। इससे अधिक बिजली देने पर इसे नियम उल्लंघन माना जाएगा। सभी अधीक्षण अभियंताओं, एक्जीक्यूटिव, असिस्टेंट और जूनियर इंजीनियरों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा। उल्लंघन की रिपोर्ट हेडक्वार्टर को भेजी जाएगी।
किसान संगठन नाराज
प्रदेश के कई किसान संगठनों ने भी इस निर्देश का विरोध किया है। उनका कहना है कि खेती में सिंचाई का समय मौसम और फसल की प्रकृति के अनुसार बदलता रहता है, ऐसे में बिजली की आपूर्ति को कठोर रूप से 10 घंटे तक सीमित करना किसानों की जरूरतों के विपरीत है।
बिजली विभाग की सफाई
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कहा है कि “कुछ असामाजिक तत्वों के दबाव में कई बार किसानों को घोषित समय से अधिक बिजली दी जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।” इसके अलावा 24×7 घरेलू फीडरों पर बिजली आपूर्ति में भी बाधा आती है। विभाग का कहना है कि निर्धारित समय से अधिक बिजली देने से कंपनी को तकनीकी और वित्तीय नुकसान होता है, जिससे विद्युत वितरण परियोजनाओं पर असर पड़ता है।
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