निवाड़ी: प्रभा देवी ने ‘नैनो बगीचा’ तैयार कर अपनी आजीविका को एक नई दिशा दी
10 फरवरी 2026, निवाड़ी: निवाड़ी: प्रभा देवी ने ‘नैनो बगीचा’ तैयार कर अपनी आजीविका को एक नई दिशा दी – अक्सर कहा जाता है कि खेती अब फायदे का सौदा नहीं रही, लेकिन निवाड़ी जिले के ग्राम नेगुआ की रहने वाली प्रभा देवी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। मात्र 744 वर्ग मीटर जमीन पर वैज्ञानिक पद्धति और प्राकृतिक तरीके से ‘नैनो बगीचा’ तैयार कर उन्होंने अपनी आजीविका को एक नई दिशा दी है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर – प्रभा देवी और उनके पति धर्मेंद्र के पास कुल 1.5 एकड़ जमीन है। पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, लेकिन मौसम की अनिश्चितता और खेती की बढ़ती लागत के कारण उन्हें पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल पा रहा था। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि प्रभा देवी के पति को घर चलाने के लिए मजदूरी करने अन्यत्र जाना पड़ता था। वर्ष 2023 में प्रभा देवी के जीवन में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब उनके गाँव में सृजन संस्था ने दस्तक दी। संस्था के सहयोग से गाँव में ‘जय माँ देवी महिला उत्पादक समूह’ का गठन हुआ। समूह से जुड़ने के बाद प्रभा देवी को खेती की नई बारीकियों और ‘नैनो बगीचा’ (छोटे बागान) की अवधारणा के बारे में पता चला।
सृजन की टेक्निकल टीम के मार्गदर्शन में प्रभा देवी ने अपनी जमीन के एक छोटे से हिस्से (744 वर्ग मीटर) पर अमरूद का बाग लगाने का निर्णय लिया। 3×4 मीटर की दूरी पर L-49 किस्म के 40 और ताइवान पिंक किस्म के 20 पौधे लगाए गए। पूरे बागान में रसायनों के स्थान पर पूरी तरह से प्राकृतिक खेती की गई, जिससे लागत कम हुई और गुणवत्ता बढ़ी। सृजन संस्था द्वारा उन्हें अन्य गाँवों के सफल बागानों का भ्रमण कराया गया और तकनीकी ट्रेनिंग दी गई, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
कम लागत, बड़ा मुनाफा कड़ी मेहनत और तकनीकी ज्ञान का परिणाम इस साल अमरूद की बंपर फसल के रूप में सामने आया। प्रभा देवी ने बाजार की मांग के अनुसार सही समय पर अपनी 550 किलो अमरूद बेचकर ₹22,000 की आय हुई। अमरूद के पौधों के बीच खाली जगह का उपयोग कर उन्होंने मूली और पत्ता गोभी उगाई, जिससे उन्हें ₹8,500 का अतिरिक्त लाभ हुआ। एक छोटे से हिस्से से उन्होंने कुल ₹30,500 की कमाई की, जो उनकी आजीविका के लिए एक बड़ा सहारा बनी। आज प्रभा देवी न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक रोल मॉडल बन गई हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि कम जमीन पर भी समझदारी, सही तकनीक और प्राकृतिक तरीकों का समावेश किया जाए, तो खेती आजीविका सुधार का सबसे सशक्त माध्यम बन सकती है।
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