महाराष्ट्र में प्राकृतिक खेती को मिलेगी रफ्तार, 25 लाख हेक्टेयर में लागू होगा मिशन: फडणवीस
25 दिसंबर 2025, भोपाल: महाराष्ट्र में प्राकृतिक खेती को मिलेगी रफ्तार, 25 लाख हेक्टेयर में लागू होगा मिशन: फडणवीस – महाराष्ट्र सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों में राज्य की 25 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया जाएगा। यह जानकारी उन्होंने नागपुर स्थित लक्ष्मीनारायण प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मिशन को पूरी गंभीरता और ईमानदारी के साथ लागू करेगी।
क्या है प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती ऐसी पद्धति है, जिसमें रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे हाइब्रिड बीजों का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता। इसमें गाय के गोबर, गोमूत्र, खेत में उपलब्ध घास-फूस और प्राकृतिक तरीकों से तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल होता है। इस पद्धति से मिट्टी की सेहत बनी रहती है, ज़मीन ज़हरीली नहीं होती और फसल भी अधिक पौष्टिक व सुरक्षित होती है। प्राकृतिक खेती प्रकृति के संतुलन को समझते हुए की जाती है, जिससे लंबे समय तक खेती टिकाऊ बनी रहती है।
किसानों को क्यों है प्राकृतिक खेती की जरूरत
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आज किसान कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और मौसम की अनिश्चितता ने जोखिम और बढ़ा दिया है। प्राकृतिक खेती इन समस्याओं का प्रभावी समाधान है। इसमें खाद और दवाओं पर कम खर्च आता है, जिससे किसानों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ने की संभावना बनती है।
महाराष्ट्र में पहले से चल रहा है प्राकृतिक खेती का काम
महाराष्ट्र में प्राकृतिक खेती की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। शुरुआती दौर में सीमित किसानों ने इसे अपनाया, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया। वर्तमान में राज्य में लगभग 14 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। वर्ष 2023 में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से अपील की थी कि प्राकृतिक खेती को एक मिशन के रूप में लागू किया जाए। इसके बाद राज्य सरकार ने इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने का फैसला लिया।
रासायनिक खेती से हो रहा है नुकसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि रासायनिक खाद, कीटनाशक और हाइब्रिड बीजों के अत्यधिक उपयोग से खेती का खर्च तो बढ़ा ही है, साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता भी कमजोर हुई है। कई इलाकों में ज़मीन धीरे-धीरे बंजर होने लगी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। प्राकृतिक खेती में स्थानीय और सस्ते संसाधनों का उपयोग होता है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनती है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती और समाधान
तेजी से बदलते मौसम ने खेती को और अधिक जोखिम भरा बना दिया है। कभी अत्यधिक बारिश, कभी सूखा और कभी ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्राकृतिक खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हो सकती है। यह पद्धति मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ाती है और फसलों को अधिक मजबूत बनाती है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं का असर कम होता है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदेमंद कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद जरूरी है। यह खेती हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर काम करना सिखाती है। जब मिट्टी, पानी और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे, तभी स्वस्थ अन्न का उत्पादन संभव होगा।
महाराष्ट्र सरकार का 25 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती लागू करने का यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
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