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मध्यप्रदेश में नर्मदा-क्षिप्रा सिंचाई परियोजना शुरू: 30 हजार हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी

21 मार्च 2025, भोपाल: मध्यप्रदेश में नर्मदा-क्षिप्रा सिंचाई परियोजना शुरू: 30 हजार हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी – मध्यप्रदेश के तराना में गुरुवार को नर्मदा-क्षिप्रा माइक्रो-उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण हुआ। इस परियोजना के तहत 2,489.65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस योजना से उज्जैन और शाजापुर जिले के 100 गांवों की 30,218 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि नर्मदा का पानी सूखे खेतों तक पहुंचेगा, जिससे फसल उत्पादन में मदद मिलेगी।

लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यह परियोजना नदी जोड़ो अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत देश में हर खेत तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी बड़ी परियोजनाएं शुरू हुई हैं। अब नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना से तराना में पानी आया है।” समारोह में उज्जैन जिला प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया और स्थानीय विधायकों ने भी हिस्सा लिया।

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क्या है यह परियोजना?

नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना के तहत ओंकारेश्वर जलाशय से 435 मीटर की ऊंचाई तक पानी उठाया जाएगा। इसके लिए 200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन और 6 पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जहां 50 पंप मोटर सेट लगाए गए हैं। परियोजना में 89 मेगावाट बिजली का इस्तेमाल होगा। कुल 2,254 किलोमीटर की वितरण पाइपलाइन से 30,218 हेक्टेयर जमीन तक पानी पहुंचेगा। इसमें उज्जैन की तराना और घटिया तहसील के 83 गांव (27,490 हेक्टेयर) और शाजापुर तहसील के 17 गांव (2,728 हेक्टेयर) शामिल हैं।

यह प्रणाली स्काडा तकनीक से संचालित होगी, जिससे 2.5 हेक्टेयर के छोटे खेतों तक भी 20 मीटर दबाव के साथ पानी पहुंचेगा। इससे किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर कम पानी में ज्यादा सिंचाई कर सकेंगे।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 250 से ज्यादा नदियां हैं और नदी जोड़ो परियोजनाओं से इनका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने बताया कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच 20 साल पुराना विवाद खत्म हुआ है, जबकि केन-बेतवा परियोजना पर भी काम शुरू हो गया है।

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किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं

डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों को हर साल 12,000 रुपये (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से) दे रही है। इस साल गेहूं 2,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए 10 गाय पालने वालों को अनुदान और दूध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर की मदद दी जाएगी।

महिलाओं के लिए भी कई घोषणाएं की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडीमेड गारमेंट उद्योग में काम करने वाली महिलाओं को 5,000 रुपये मासिक प्रोत्साहन मिलेगा और इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। साथ ही, स्थानीय निकायों में 50% और नौकरियों में 35% महिला आरक्षण का जिक्र भी किया।

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