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राज्य कृषि समाचार (State News)

रायलसीमा में कृषि का मेगा मिशन: ₹1 लाख करोड़ से बनेगा ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब

9.6 लाख किसानों को फायदा, 201 क्लस्टर होंगे विकसित; रिलायंस लाएगा एआई, ड्रोन और जियो कृषि तकनीक

06 अक्टूबर 2026, अमरावती: रायलसीमा में कृषि का मेगा मिशन: ₹1 लाख करोड़ से बनेगा ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब – आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में बागवानी और कृषि की तस्वीर बदलने के लिए करीब ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब (GHH) विकसित किया जा रहा है। करीब 10 जिलों में 201 बागवानी क्लस्टर विकसित करने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना से लगभग 9.6 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत बागवानी का रकबा 8.4 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 14.4 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ₹40 हजार करोड़, निजी क्षेत्र लगाएगा ₹60 हजार करोड़ – इस परियोजना में करीब ₹40,000 करोड़ सार्वजनिक एवं सरकारी निवेश और करीब ₹60,000 करोड़ निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है। सरकार की तीन-वर्षीय योजना में सिंचाई के लिए ₹20,884 करोड़, बागवानी के लिए ₹14,906 करोड़ और ग्रामीण सड़कों के लिए ₹4,562 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

रिलायंस की तकनीकी ताकत होगी अहम-  2 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक श्री अनंत अंबानी ने रायलसीमा हॉर्टिकल्चर हब और अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर (ISA) में रिलायंस की भागीदारी की घोषणा की। परियोजना का शिलान्यास आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया।

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रिलायंस की भागीदारी में जियो कृषि तकनीक, एआई एवं डेटा आधारित खेती, डिजिटल किसान प्रशिक्षण, ड्रोन, रोबोटिक्स, मूल्य इंटेलिजेंस और हाईटेक पशुपालन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसका उद्देश्य कृषि को तकनीक आधारित बनाने के साथ नई पीढ़ी के युवाओं को खेती से जोड़ना भी है।

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‘बीज से शिपमेंट’ तक बनेगी पूरी वैल्यू चेन – ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब का फोकस केवल खेती का रकबा बढ़ाने पर नहीं है। इसके तहत सिंचाई → उत्पादन → संग्रहण → कोल्ड चेन → प्रसंस्करण → पैकेजिंग → लॉजिस्टिक्स → घरेलू बाजार एवं निर्यात की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है।

इसमें आम, केला, टमाटर, अनार, खजूर, ड्रैगन फ्रूट, तरबूज, नींबू, मीठा संतरा, एवोकाडो, सेब और बेरीज जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। आम का पल्प, केला उत्पाद, टमाटर प्यूरी और डिहाइड्रेटेड फलों जैसी प्रसंस्करण इकाइयों से किसानों को उत्पादन के साथ मूल्य संवर्धन का लाभ मिलने की उम्मीद है।

₹1 लाख करोड़ रिलायंस का निवेश नहीं – इस परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ₹1 लाख करोड़ रिलायंस का अकेले का निवेश नहीं है। यह पूरे ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब का अनुमानित निवेश है, जिसमें सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों की भागीदारी होगी।

रिलायंस का ₹65,000 करोड़ का 500 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों का कार्यक्रम अलग परियोजना है, जो कृषि अवशेष और बायोमास आधारित ऊर्जा से जुड़ा है।

रायलसीमा में यह पहल किसानों के लिए केवल नई फसलों और अधिक उत्पादन का अवसर नहीं, बल्कि तकनीक, सिंचाई, प्रसंस्करण, बेहतर बाजार, निर्यात और मूल्य संवर्धन से जुड़ी नई कृषि अर्थव्यवस्था का आधार बन सकती है।

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