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राज्य कृषि समाचार (State News)

14 साल से कई पद रिक्त, छात्र भोग रहे विषयों के वनवास का दंड

20 अगस्त 2022, इंदौर । 14 साल से कई पद रिक्त, छात्र भोग रहे विषयों के वनवास का दंड – 63 वर्ष पूर्व 1959 में स्थापित कृषि शिक्षा के केंद्र कृषि महाविद्यालय इंदौर के अतीत पर नजर डालें तो गर्व होता है कि यहां करीब एक शताब्दी पूर्व इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट इंडस्ट्री स्थापित की गई थी, वहीं दूसरी ओर इस महाविद्यालय में गत 14 वर्षों से कई विषयों के पद रिक्त हैं, तो शर्म महसूस होती है। विषयों के इस वनवास का दंड यहां पढऩे वाले छात्रों को भोगना पड़ रहा है।

इतने लम्बे अर्से तक रिक्त पदों की पूर्ति नहीं करने के पीछे की कोई बड़ी वजह तो नहीं है? इसका महाविद्यालय की बेशकीमती जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए भू माफियाओं के बीच कोई अपरोक्ष संबंध तो नहीं है? क्या रिक्त पदों से उपजी अव्यवस्था से प्रभावित परीक्षा परिणामों को मुद्दा बनाकर इसे बंद करने/ विस्थापित करने की साजिश तो नहीं की जा रही है ? जेहन में ऐसे कई सवाल आ रहे हैं, जिनका जवाब शायद ही मिले। हालाँकि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के आश्वासन के बाद इस कॉलेज की जमीन को लेने का मामला फिलहाल ठंडा पड़ गया है, लेकिन भविष्य में ऊंट किस करवट बैठ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता।

खाली पद 

कृषि महाविद्यालय में शस्य विज्ञान, प्लांट फिजियोलॉजी, प्लांट पैथोलॉजी, प्लांट ब्रीडिंग, एग्री इंजीनियरिंग आदि महत्वपूर्ण विषयों के सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। जबकि इनमें 9 विषयों में अतिथि विद्वान पढ़ाते हैं। इसके अलावा फार्म मैनेजर, लाइब्रेरियन और पीटीआई के पद भी खाली हैं। बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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जन भावनाओं को किया दरकिनार

यह कितने आश्चर्य का विषय है कि जो कृषि महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय बनने का दावा रखता हो। जिसके लिए सरकार की तरफ से भी सहमति दी जाकर कृषि मंत्री द्वारा प्रस्तावित कृषि विश्व विद्यालय का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने की घोषणा भी की जा चुकी हो, वहां पर विद्यार्थियों और जन भावनाओं को दरकिनार कर रिक्त पदों की पूर्ति न करना क्या दर्शाता है? सूत्रों के मुताबिक भू माफियाओं की नजर पडऩे के बाद इस जमीन का बचना मुश्किल है। कालान्तर में किसी अन्य बहाने से यह जमीन अधिग्रहित कर ली जाएगी।

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एग्री अंकुरण वेलफेयर एसोसिएशन (आवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राधे जाट ने कृषक जगत को बताया कि इंदौर के कृषि महाविद्यालय में रिक्त पदों की पूर्ति नहीं की जाकर इंदौर की गौरवशाली छवि को धूमिल किया जा रहा है। प्राध्यापकों की कमी से कई कार्य रुक रहे हैं। इस महाविद्यालय को सालाना 45 लाख की ग्रांट दी जा रही है, जबकि अन्य कृषि महाविद्यालयों को गत 3-4 सालों में 4-5 करोड़ की राशि देकर इंदौर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। रिक्त पदों को नहीं भरने से भाकृअप के अनुसंधान के विभिन्न प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो रहे हैं।

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