दलहन आयात नीति दीर्घावधि की बनाएं

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आभासी बैठक में दाल मिल एसोसिएशन ने दिए  सुझाव

8 सितम्बर 2021, इंदौर ।  दलहन आयात नीति  दीर्घावधि की बनाएं – भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत  विदेश व्यापार मंत्रालय द्वारा आयोजित आभासी बैठक  विदेश व्यापार के उपनिदेशक श्री मोहम्मद मोईन आफ़ाक़ की अध्यक्षता में उद्योग भवन, नई दिल्ली में गत दिनों सम्पन्न हुई।इस बैठक  में भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री बी.वी.आर.सुब्रमण्यम, विदेश व्यापार मंत्रालय के निदेशक श्री अमित यादव एवं अतिरिक्त निदेशक श्री हरदीप सिंघ के साथ देश के विभिन्न संगठनों ने  दालों के आयात के अलावा  आयात पालिसी सही करने , थोक माल परिवहन की उपलब्धता के आकलन, विश्व बाजार में दालों की उपलब्धता का माहवार आकलन एवं दालों के आयात में विभिन्न चुनौतियों जैसे गंभीर विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। इस आभासी  बैठक  में ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन की ओर से संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष/चेयरमैन श्री सुरेश अग्रवाल ने प्रतिनिधित्व कर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 श्री सुरेश अग्रवाल ने सुझाव दिया  कि – मलावी, ज़िम्बाब्वे, साउथ अफ्रीका, केन्या सहित अन्य देशों में तुअर का उत्पादन जुलाई, अगस्त एवं सितम्बर होता है, वहां की तुअर देश में आने में लगभग दो  माह का समय लगता है, इसलिए  दालों की आपूर्ति सुगम  बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष तुअर और उड़द का आयात कोटा 6 लाख मैट्रिक टन  निर्धारित किया जाए । यही नहीं  देश की दाल इंडस्ट्रीज को आयात लाइसेंस जारी करना चाहिए, ताकि  देश में दलहन के उत्पादन में  कमी को दूर करने के लिए  विदेशों से दलहन आयात कर बनाई गई दाल आम उपभोक्ताओं को आसानी से उपलब्ध करा सकें। श्री अग्रवाल ने दलहनों के आयात की नीति  को कम समयावधि के बजाए दीर्घावधि की बनाने का सुझाव दिया।  इससे दाल इंडस्ट्रीज में उत्पादन कार्य निरंतर बना रहेगा। इससे  देश के किसानों एवं दाल मिलर्स को नुकसान नहीं होगा। देश में मटर का आयात ओपन किया जाए , ताकि मटर के उत्पादन की कमी को समर्थन मिल सके। सरकार ने मटर पर आयात ड्यूटी लगा रखी है, जिसके कारण कनाडा और रशिया का मटर काफी महंगा  पड़ता है, अतः आयात ड्यूटी समाप्त की जाए।

 भारत सरकार ने दलहनों की आपूर्ति के लिए तुअर, उड़द एवं मूंग का देश के बाहर से आयात करने की अनुमति दी  31 अक्टूबर 2021  तक दी है। दाल मिल संगठन ने इसकी समय सीमा दिनांक 31  मार्च 2022 तक करने का अनुरोध किया है, क्योंकि कोविड के कारण अन्य देशों से माल आयात होने में पूर्व की तुलना में अधिक समय लग रहा है। वेसल और कंटेनर की अन्य देशों में काफी कमी है, जिससे तुअर, उड़द आयात होने में काफी विलम्ब हो रहा है । आपने कंटेनर एवं अन्य माल वाहक परिवहन की संख्या बढ़ाने , दलहन आयात पर कंटेनर शुल्क, जहाज का भाड़ा (फ्रेट चार्ज) और  इम्पोर्ट ड्यूटी भी ज्यादा है ,जबकि  तुअर के आयात की समयावधि भी ज्यादा नहीं बची है, तुअर अफ्रीका से अब आना चालू होगी। तुअर को आयात की समयावधि से मुक्त करना चाहिए, ताकि 31  मार्च .2022 तक तुअर का आयात सुगमता से हो सके। श्री अग्रवाल ने कहा कि उड़द का आयात भी सिर्फ म्यांमार (बर्मा) से होता है। अभी तक उड़द का अनुमानित आयात 2 लाख  मैट्रिक टन तक हो चुका है। उड़द की आपूर्ति पूर्ण करने के लिए उड़द का आयात चालू रखना चाहिए और इसकी  समयावधि 31 मार्च 2022 तक बढ़ानी चाहिए। शिपिंग में भी कई तरह की परेशानियां आ रही हैं, सैंपल को लेकर एफएसएसएआई को इसका समाधान करना चाहिए। कोविड और डिमांड की वजह से कई शिपिंग कंपनियों ने भाड़े के रेट तीन गुना कर दिए हैं, भाड़े की कीमतें बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को दालें मंहगी मिलेंगी, अतः इस व्यवस्था में सुधार किया जाए । सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि दाल इंडस्ट्रीज की सभी समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित विभागों से चर्चा कर उसके निराकरण की दिशा में कार्यवाही की जावेगी।

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