मध्यप्रदेश: औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य
18 नवंबर 2025, भोपाल: मध्यप्रदेश: औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य – मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में 46,837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों की खेती की जा रही है, जिसमें प्रमुख फसलें ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, कोलियस और अन्य औषधीय पौधे शामिल हैं। 2024-25 में लगभग 1.24 लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है, जो राज्य में बढ़ती हुई कृषि विविधता और उभरते बाजार का संकेत है। मध्यप्रदेश में औषधीय फसलों की खेती एक नये दौर में प्रवेश कर चुकी है, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है। राज्य सरकार के प्रयासों और प्रोत्साहन की वजह से मध्यप्रदेश जल्द ही औषधीय फसलों के उत्पादन में देशभर में और भी मजबूत स्थान बना रहा है।
कृषि क्षेत्र में वृद्धि
मध्यप्रदेश में औषधीय फसलों का क्षेत्र 2022-23 में 44,324 हैक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 46,837 हैक्टेयर हो गया है, जो लगभग 2,512 हैक्टेयर की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि राज्य में औषधीय फसलों के प्रति किसानों का बढ़ता हुआ आकर्षण और उनकी बढ़ती हुई आय के संकेत है। इस दौरान उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में उत्पादन 1.17 लाख मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 1.24 लाख मीट्रिक टन हो गया।
मध्यप्रदेश का औषधीय फसल उत्पादन में प्रमुख स्थान
भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। देशभर में उत्पादित औषधीय फसलों का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश से आता है। यह राज्य सरकार के किसानों को अनुदान, प्रोत्साहन और औषधीय पौधों की खेती के लिए दी जा रही सुविधाओं का परिणाम है।
सरकार की पहल और किसानों का समर्थन
राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 20 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। इसके साथ ही पारंपरिक फसलों के अलावा वाणिज्यिक औषधीय फसलों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिल सके। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं।
मुख्य औषधीय फसलें और उनका क्षेत्र
मध्यप्रदेश में प्रमुख औषधीय फसलों के उत्पादन की स्थिति -:
ईसबगोल – 13,000 हैक्टेयर
अश्वगंधा – 6,626 हैक्टेयर
सफेद मूसली – 2,403 हैक्टेयर
कोलियस – 974 हैक्टेयर
अन्य औषधीय फसलें – 23,831 हैक्टेयर
इसके अलावा, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को औषधीय पौधों की खेती में प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार आयुर्वेद कंपनियों जैसे डाबर, वैद्यनाथ और संजीवनी क्लिनिक के माध्यम से इन फसलों को बाजार उपलब्ध करवा रही है।
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