मध्यप्रदेश: एकीकृत खेती से किसान पुरुषोत्तम की बढ़ी आय, कम लागत में हो रहा अच्छा मुनाफा
06 मार्च 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: एकीकृत खेती से किसान पुरुषोत्तम की बढ़ी आय, कम लागत में हो रहा अच्छा मुनाफा – अक्सर कहा जाता है कि खेती अब घाटे का सौदा है, लेकिन कटनी जिले के स्लीमनाबाद तहसील के ग्राम तेवरी के प्रगतिशील किसान पुरुषोत्तम ठाकुर ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपनी 25 एकड़ भूमि पर आधुनिक तकनीक, उद्यानिकी और पशुपालन का ऐसा समन्वित मॉडल विकसित किया है, जो आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
सोलर पंप से सिंचाई में आत्मनिर्भरता
सिंचाई की समस्या के समाधान के लिए पुरुषोत्तम ने वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना के तहत 3 एचपी का सोलर पंप स्थापित किया। योजना में 90 प्रतिशत अनुदान मिलने से उन्हें केवल 36 हजार रुपये का निवेश करना पड़ा। अब उनकी खेती बिजली कटौती और डीजल खर्च से पूरी तरह मुक्त हो चुकी है, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि हुई है।
उद्यानिकी और औषधीय फसलों से आय में वृद्धि
किसान पुरुषोत्तम ने पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को भी जोड़ा। उनके खेत में 10 किस्मों के लगभग 250-300 आम के पौधे तथा 100 से अधिक आंवला के पौधे लगे हैं। साथ ही, आत्मा विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अश्वगंधा और चिया जैसी उच्च मांग वाली औषधीय फसलों की खेती शुरू की है। कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण इन फसलों से उन्हें अतिरिक्त मुनाफा प्राप्त हो रहा है।
पशुपालन बना नियमित आय का आधार
खेती के साथ पशुपालन को जोड़ते हुए पुरुषोत्तम ने 10 दुधारू मुर्रा भैंसों का पालन किया है। उन्नत नस्ल की इन भैंसों से प्राप्त दूध उनकी दैनिक आय का मजबूत स्रोत है। साथ ही, गोबर से जैविक खाद तैयार कर वे अपनी फसलों की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हुई है।अंतर्वर्ती खेती से भूमि का अधिकतम उपयोग भूमि का बेहतर उपयोग करने के लिए उन्होंने इंटर-क्रॉपिंग (अंतर्वर्ती खेती) अपनाई है। खेतों में सागौन एवं अन्य कीमती पौधे लगाए हैं, जो भविष्य में उन्हें दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगे।
बने क्षेत्र के रोल मॉडल
पुरुषोत्तम ठाकुर का कहना है कि यदि किसान शासकीय योजनाओं का सही लाभ लें और फसल विविधीकरण के साथ पशुपालन को जोड़ें, तो आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है।उनकी यह सफलता कहानी दर्शाती है कि समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर खेती को लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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