म.प्र. बजट 2022-23 बना किसानों के मुस्कुराने की वजह

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कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 40916 करोड़ रुपए

  • (विशेष प्रतिनिधि)

12 मार्च 2022, भोपाल ।  म.प्र. बजट 2022-23 बना किसानों के मुस्कुराने की वजहम.प्र. विधान सभा में गत दिनों प्रदेश के वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने वर्ष 2022-23 के लिए 2 लाख 79 हजार 237 करोड़ का बजट पेश किया। इस लोकलुभावन एवं मनमोहक बजट में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए 40 हजार 916 करोड़ का प्रावधान किया गया है जो गत वर्ष की तुलना में 5563 करोड़ रुपए अधिक है। क्योंकि गत वर्ष 2021-22 में बजट 35 हजार 353 करोड़ था। बजट में वृद्धि हुई, यही वजह है किसानों के मुस्कुराने की। सरकार ने विशेष ध्यान दिया तथा सर्वाधिक राशि कृषि एवं सम्बद्ध विभागों को दी। किसान, गरीब एवं गांव के लिए खजाने का मुंह खोल दिया। कोई नया कर नहीं लगाया और न ही बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।

मुख्य बिन्दु

  • अटल कृषि ‘योति योजना –                   रु. 4592 करोड़
  • सीएम किसान कल्याण योजना –           रु. 3200 करोड़
  • प्रधानमंत्री ” ग्राम सडक़ योजना –          रु. 2930 करोड़
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना –           रु. 2000 करोड़
  • मुख्यमंत्री फसल उपार्जन योजना –        रु. 1500 करोड़
  • सहकारी बैंकों को अंशपूंजी –               रु. 1000 करोड़
विभाग 
  • कृषि विभाग – 15706 करोड़
  • सहकारिता विभाग – 1960 करोड़
  • पशुपालन एवं डेयरी विभाग – 1443 करोड़
  • मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग –  250 करोड़
  • उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग – 668 करोड़

अर्थव्यवस्था की धुरी कहलाने वाले किसान, खेत-खलिहान और इससे जुड़े क्षेत्रों पशुपालन, सिंचाई, सहकारिता, उद्यानिकी- खाद्य प्रसंस्करण में 2022-23 के लिए 40 हजार 916 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि इससे खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों की आय बढ़ेगी। बजट में कृषि विभाग के लिए 15706 करोड़ रखे हैं। पिछले बजट में यह 15191 करोड़ था। इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के बजट में 4 प्रतिशत की कमी की है। बजट में 668 करोड़ रखे, जबकि पिछले बजट में राशि 699 करोड़ थी। सहकारिता के बजट में 38 प्रतिशत की वृद्धि कर 1960 करोड़ तो पशुपालन एवं डेयरी में 35 प्रतिशत की वृद्धि कर 1443 करोड़ किए गए हैं।

श्री देवड़ा ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जाएगा। इसके लिए कृषि अधोसंरचना निधि का सदुपयोग करने के लिए नई योजना लागू की जाएगी। इसके माध्यम से प्रसंस्करण और भंडारण को प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर रहेगा।

किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी। इसमें निर्यातकों से संपर्क करने, अन्य रा’यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने, प्रदेश के व्यापारियों को प्रशिक्षण दिलाने का काम किया जाएगा। इसी तरह फसलों में विविधता लाने के लिए नई योजना लागू होगी। किसान एक ही तरह की फसल सालों-साल लेते रहते हैं। इसका असर उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। इसे देखते हुए मांग, आधारित कृषि विविधीकरण पर जोर दिया जाएगा। जैविक केती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा

नर्मदा नदी के दोनों तट पर प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जाएगा। प्राकृतिक खेती का क्षेत्र एक लाख हे. तक पहुंचाया जाएगा। शरबती गेहूं, कालीमूंछ चावल, जीरा शंकर चावल और पिपरिया की दाल को जीआई टैग दिलाने की कार्यवाही की जा रही है। नरवाई जलाने की समस्या से निपटने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन योजना लागू की जाएगी। इसमें कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से ऐसे उपकरण उपलब्ध कराएजाएंगे, जो फसल अवशेष को व्यवस्थित करने में सहायक साबित होंगे। कृषि उत्पादक संगठनों के गठन में गति लाई जाएगी।

सहकारी क्षेत्र में संस्थाओं का उन्नयन किया जाएगा। कृषि प्रशासनिक सहकारी समितियों का कम्प्यूटराईजेशन वर्ष 2022-23 में करने का लक्ष्य है।
वित्तमंत्री ने कहा कि रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पशुपालन योजना प्रारंभ की जा रही है जिसके लिए 150 रुपए करोड़ रुपए का प्रावधान है साथ ही मुख्यमंत्री मछलीपालन विकास योजना के लिए 50 करोड़ रखे गए हैं।

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