लेमन ग्रास की खेती- किसानों के लिए कमाई का उत्तम विकल्प, एक एकड़ से हो रही एक लाख तक की कमाई
09 जनवरी 2026, रायपुर: लेमन ग्रास की खेती- किसानों के लिए कमाई का उत्तम विकल्प, एक एकड़ से हो रही एक लाख तक की कमाई – छत्तीसगढ़ राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के उद्देश्य से औषधीय एवं सुगंधित पौधों का कृषिकरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत लेमन ग्रास की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ कमाने का एक उत्कृष्ट विकल्प बनकर उभर रही है।
किसानों को मिलती है अच्छी आय
लेमन ग्रास (नींबू घास) किसानों के लिए एक बेहतरीन, कम लागत, अधिक मुनाफे वाली फसल है, जिसे बंजर या पथरीली ज़मीनों पर भी उगाया जा सकता है और यह कम पानी व कम देखभाल में साल में 4-5 बार कटाई देती है, जिससे 1 लाख/एकड़ तक की कमाई संभव है, क्योंकि इसके तेल की मांग परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स में बहुत है, साथ ही चाय और दवाइयों में भी इसका उपयोग होता है, जिससे किसानों को अच्छी आय मिलती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टर और कृषि विभाग को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वन मंत्री श्री केदार कश्यप तथा छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम लगातार किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। लेमनग्रास खेती के लिए निःशुल्क पौधे व तकनीकी सहायता
औषधि पादप बोर्ड द्वारा लेमन ग्रास की खेती करने वाले किसानों को निशुल्क स्लिप्स (पौधे) प्रदान किए जा रहे हैं। खेती को बेहतर ढंग से विकसित करने के लिए 40-50 किसानों का 1-2 किलोमीटर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर खेती कराई जाती है। बोर्ड गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, मार्केटिंग सहयोग और खरीदी के लिए एमओयू की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।
निःशुल्क प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण
किसानों को लेमनग्रास की खेती से संबंधित संपूर्ण जानकारी देने के लिए बोर्ड द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। इसमें खेत तैयार करने, पौध रोपण, देखभाल से लेकर आसवन प्रक्रिया के जरिए तेल निकालने तक की पूरी तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
लेमन ग्रास की खेती-आसान, सुरक्षित और कम लागत वाली
लेमनग्रास (Cymbopogon flexuosus) एक बहुवर्षीय सुगंधित घास है। इसके लिए मिट्टी का पीएच 6.6 से 8.0 उपयुक्त माना जाता है। भरपूर धूप वाली जगह पर फसल अच्छी बढ़ती है। जून माह पौध रोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। एक एकड़ में लगभग 25,000 पौधों की जरूरत होती है।
गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद से उत्पादन बेहतर मिलता है। 7-10 दिन में एक बार सिंचाई आवश्यक है। लेमनग्रास में सामान्यतः कीटों का प्रकोप नहीं होता, इसलिए कीटनाशक की आवश्यकता नहीं पड़ती। पहली कटाई 6 माह बाद की जाती है। इसके बाद हर 3 माह में कटाई होती है और एक बार लगाई गई फसल से लगभग 5 वर्ष तक उत्पादन मिलता है।
तेल उत्पादन और आय
लेमन ग्रास की घास को आसवन प्रक्रिया से तेल में बदला जाता है। इसका उपयोग साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और अरोमा उद्योगों में काफी अधिक है। प्रथम वर्ष प्रति एकड़ 60-80 किग्रा तेल,दूसरे वर्ष से लगभग 100 किग्रा तेल का बाजार मूल्य 1200 से 1600 रुपए प्रति किग्रा है जिसकी कुल लागत लगभग 20 हजार रुपए प्रति एकड़ वार्षिक लाभ 80 हजार से एक लाख रुपए तक है।
किसानों के लिए लाभ कमाने का उत्कृष्ट विकल्प
उल्लेखनीय है कि कम लागत, सुरक्षित खेती और लगातार कई वर्षों तक उत्पादन के कारण लेमनग्रास को किसानों के लिए लाभ कमाने का उत्कृष्ट विकल्प बनाते हैं। राज्य सरकार की यह पहल किसानों को औषधीय पौधों की खेती अपनाने और अपनी आय को लगातार बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
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