राज्य कृषि समाचार (State News)

आगामी 5 वर्षों में मध्य प्रदेश की सिंचाई क्षमता एक करोड़ हेक्टेयर के पार होगी; नवकरणीय ऊर्जा को देंगे बढ़ावा

06 मार्च 2024, भोपाल: आगामी 5 वर्षों में मध्य प्रदेश की सिंचाई क्षमता एक करोड़ हेक्टेयर के पार होगी; नवकरणीय ऊर्जा को देंगे बढ़ावा – मध्य प्रदेश में नागरिकों को पेयजल और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं। परियोजनाओं के कार्य समय पर पूरे हों। उक्त निर्देश सीएम डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग के कार्यों की सतत समीक्षा करते हुए कही।

मुख्यमंत्री को समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश का सिंचाई क्षेत्र अगले पांच साल में एक करोड़ हेक्टेयर को पार कर जाएगा। ओंकारेश्वर के फ्लोटिंग प्लांट से ऊर्जा उत्पादन शीघ्र प्रारंभ होगा। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की इस परियोजना से प्रारंभ में 50 मेगावाट उत्पादन होगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा भी उपस्थित थीं।

वर्षों में सिंचाई क्षमता 93 लाख हेक्टेयर से अधिक होगी

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में जल संसाधन विभाग के माध्यम से वर्तमान में 41. 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 8.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है, इस तरह कुल 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है। प्रदेश में निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने पर सिंचाई क्षेत्र जल संसाधन विभाग का 23.66 लाख हेक्टेयर और नर्मदा घाटी विकास विभाग का 43. 21लाख हेक्टेयर बढ़ जाएगा। इन योजनाओं के आगामी 5 वर्ष में पूर्ण हो जाने पर प्रदेश की सिंचाई क्षमता 93 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो जाएगा।

साल-दर-साल बढ़ेगा सिंचाई क्षेत्र

बैठक में बताया कि जल संसाधन विभाग के कार्यों से प्रदेश में वर्ष दर वर्ष सिंचाई क्षेत्र बढ़ता जाएगा वर्ष 2024 में 2.75, वर्ष 2025 में 4.21, वर्ष 2026 में 4.62, वर्ष 2027 में 5.74 और वर्ष 2028 में 6.34 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस तरह इन पांच वर्ष में जल संसाधन विभाग द्वारा 23.66 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि के लिए कार्य पूरे हो जाएंगे।

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प्रदेश में 19.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगी सिंचाई सुविधा

केन बेतवा परियोजना, संशोधित पार्वती सिंध परियोजना और एनवीडीए की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से भी प्रदेश में 19.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी। इस तरह प्रदेश की सिंचाई क्षमता एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक हो जाएगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग डॉ. राजेश राजौरा ने प्रदेश के सिंचाई परिदृश्य पर प्रजेंटेशन दिया।

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आगामी सिंहस्थ के कार्यों पर भी चर्चा

मुख्यमंत्री ने बैठक में सिंहस्थ 2028 के लिए घाटों के निर्माण, क्षिप्रा और अन्य नदियों पर विभिन्न पुलों के साथ आवश्यकतानुसार स्टाप डेम निर्माण और भविष्य की जल जरूरतों के अनुरूप कार्यों की पूर्णता के निर्देश दिए।

बैठक में नागदा परियोजना, ग्वालियर एवं चंबल क्षेत्र में माधवराव सिंधिया सिंचाई परियोजना के चरणबद्ध क्रियान्वयन, क्षिप्रा रिवर बेसन अथारिटी (नमामी क्षिप्रे प्राधिकरण) के गठन, प्रदेश के डार्क जोन क्षेत्रों में बोरवेल, टैंक और सिंचाई के अन्य स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर भी चर्चा हुई।

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