राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों के लिए सस्ते कृषि लोन की पहल, बिहार सरकार ने नाबार्ड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

10 जनवरी 2026, भोपाल: किसानों के लिए सस्ते कृषि लोन की पहल, बिहार सरकार ने नाबार्ड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए – बिहार सरकार ने किसानों को सस्ते और आसान कृषि लोन उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत कृषि विभाग और नाबार्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी योजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस योजना से लाखों किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

कृषि मंत्री की मौजूदगी में ऐतिहासिक पहल

एमओयू पर हस्ताक्षर कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में किसानों को सस्ते लोन की जरूरत पहले से ज्यादा है। इस योजना से किसानों पर ब्याज का बोझ कम होगा और वे साहूकारों की बजाय संस्थागत बैंकों से लोन लेने के लिए प्रेरित होंगे।

कौन-से लोन पर मिलेगी सब्सिडी

समझौते के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा कृषि लोन पर दी जा रही 3% ब्याज सब्सिडी के अलावा, बिहार सरकार 1% अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी देगी। यह सुविधा 3 लाख रुपये तक के फसल लोन, किसान क्रेडिट कार्ड लोन और अल्पावधि कृषि उत्पादन लोन पर लागू होगी। लाभ वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के जरिए लिया जा सकेगा।

सरकार ने क्या शर्ते रखीं

योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने लोन का भुगतान करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल समय पर लोन चुकाने की आदत बनेगी, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में अनुशासन भी बढ़ेगा।

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सस्ते लोन से किसानों को मिलेगा फायदा

सरकारी बयान के अनुसार, इस ब्याज अनुदान योजना से किसानों को आधुनिक खेती की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। सस्ते लोन मिलने से किसान बेहतर बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि इनपुट्स में निवेश कर सकेंगे। इसका सीधा असर उत्पादन बढ़ोतरी और किसानों की आय में सुधार के रूप में दिखाई देगा।

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साथ ही, इस पहल से कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अधिकारियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कृषि विभाग और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। राज्य सरकार की ओर से कृषि निदेशक, संयुक्त निदेशक और सहायक निदेशक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जबकि नाबार्ड की ओर से उप महाप्रबंधक और सहायक महाप्रबंधक ने इसे अंतिम रूप दिया।

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