प्रदेश को फूड प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बनाने महत्वपूर्ण भूमिका : श्री कंसोटिया

Share

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना

  • (विशेष प्रतिनिधि)

1 फरवरी 2022, भोपाल । प्रदेश को फूड प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बनाने महत्वपूर्ण भूमिका : श्री कंसोटिया – आत्मनिर्भर भारत अभियान योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) को एक वर्ष पूर्ण हो गया है। केन्द्र प्रवर्तित इस योजना में आवेदन के लिये पोर्टल 25 जनवरी 2021 को शुरू किया गया था। पोर्टल पर राष्ट्रीय स्तर पर 3 हजार 5 सौ आवेदन जमा हुए हैं। म.प्र. में पीएमएफएमई के सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने 185 आवेदन स्वीकृत किये हैं। प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन के लिये एम.पी. एग्रो इंडस्ट्रीज डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लि. को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

  • 5 वर्षों में 10500 इकाइयों को अनुदान
  • 500 करोड़ व्यय किये जाने का प्रावधान
  • 84000 रोजगार सृजन के अवसर

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री जे.एन. कंसोटिया ने पीएमएफएमई योजना के बारे में चर्चा करते हुए कृषक जगत को बताया कि प्रदेश में असंगठित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की चुनौतियों इसके विकास को सीमित करती है। असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कौशल प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी, ऋण और विपणन के लिए सहयोग की आवश्यकता है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए म.प्र. के संदर्भ में योजना के महत्व के बारे में उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना से प्रदेश में निवेश के साथ-साथ रोजगार के विकल्प भी मिलेंगे। वर्तमान में यह माना जा सकता है कि कच्चे माल का प्रसंस्करण न होना एक महत्वपूर्ण समस्या है।

श्री कंसोटिया ने बताया कि प्रदेश में कटाई के बाद फसल का उचित प्रबंधन एवं उपयोग एक बड़ी समस्या है। क्योंकि कटाई के बाद उचित मूल्य न मिलने के कारण फसल या उपज को किसान नष्ट कर देते हैं, उन्होंने कहा कि देश में उचित शिक्षा का अभाव, इन्क्यूबेशन सेंटर्स की कमी एवं लोगों के खान-पान के आदत इसमें बड़ी समस्या है।

एक जिला – एक उत्पाद

योजना के बारे में श्री कंसोटिया ने बताया कि इस योजना में एक जिला एक उत्पाद के तहत इनपुट की खरीद, सामान्य सेवाओं का लाभ लेने तथा उत्पादों के विपणन के लाभों को प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

अनुदान भी

नवीन उद्योग की स्थापना तथा पूर्व स्थापित उद्योग के उन्नयन करने के इच्छुक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना प्रोजेक्ट लागत के 35 प्रतिशत पर क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं, अधिकतम सब्सिडी 10 लाख रुपये तक हो सकती है।

श्री कंसोटिया ने बताया कि वित्तीय सहायता के अलावा पैकेजिंग, ब्रांडिंग आदि का विकास करने के लिए ओडीओपी दृष्टिकोण अपनाते हुए योजना में स्वयं सहायता समूहों/ एफपीओ/उत्पादक सहकारिताओं तथा निजी उद्यानिकी के एसपीवी को ब्रांडिंग एवं बिक्री सहायता दी जाएगी। ब्रांडिंग और विपणन के लिए प्रस्तावों हेतु डीपीआर तैयार करने के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता राज्य नोडल एजेंसी एम.पी. स्टेट एग्रो इंड. कार्पोरेशन से उपलब्ध होगी।

ऑनलाईन आवेदन इस पोर्टल पर ) किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण खबर: मोबाईल से गेहूं उपार्जन पंजीयन की सुविधा 5 फरवरी से

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.