गुजरात में रबी सीजन के लिए आई-खेदूत पोर्टल खुला, खरीफ पंजीयन की तारीख 24 अक्टूबर तक बढ़ी
06 अक्टूबर 2026, गांधीनगर: गुजरात में रबी सीजन के लिए आई-खेदूत पोर्टल खुला, खरीफ पंजीयन की तारीख 24 अक्टूबर तक बढ़ी – गुजरात सरकार ने रबी सीजन के लिए प्रमाणित बीज, बीज मिनी किट और डेमोंस्ट्रेशन योजनाओं पर सब्सिडी के लिए आई-खेदूत पोर्टल खोल दिया है। यह पोर्टल 4 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक, यानी कुल 12 दिन के लिए खुला रहेगा।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने मूंगफली, मूंग, सोयाबीन और उड़द की MSP खरीद के लिए खरीफ फसलों के पंजीयन की अंतिम तारीख भी 15 दिन बढ़ाकर 24 अक्टूबर कर दी है। कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने यह घोषणा की।
आई-खेदूत पोर्टल राज्य सरकार की कृषि, बागवानी और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन का मुख्य माध्यम है। किसान अपने गांव में बैठकर ही इस पोर्टल के जरिए सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
तारीख बढ़ाने की वजह
कृषि मंत्री के मुताबिक कई सांसदों, विधायकों और किसान संगठनों ने पत्र लिखकर पंजीयन की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पहले मूंगफली, मूंग, सोयाबीन और उड़द उत्पादक किसानों के लिए MSP पंजीयन की खिड़की अक्टूबर के मध्य में बंद होने वाली थी।
अब किसानों के पास अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए पंजीयन कराने का तीन हफ्ते से ज्यादा का समय होगा। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे तय समय-सीमा के भीतर ही आवेदन पूरा कर लें, ताकि अंतिम दिनों में पोर्टल पर भीड़ से बचा जा सके।
मूंगफली, मूंग, सोयाबीन और उड़द जैसी फसलों का सही समय पर पंजीयन न होने से किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य का फायदा नहीं ले पाते और उन्हें खुले बाजार में कम भाव पर उपज बेचनी पड़ती है। इसीलिए पंजीयन की तारीख बढ़ना उन किसानों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है जिनकी फसल अभी खेत में ही कटने की प्रक्रिया में है।
रबी सीजन की तैयारी शुरू
आई-खेदूत पोर्टल पर रबी सीजन के लिए प्रमाणित बीज की सब्सिडी, बीज मिनी किट योजना और खेतों में नई तकनीक के प्रदर्शन से जुड़ी योजनाओं के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। किसान यह आवेदन ऑनलाइन या अपने नजदीकी ग्राम सेवा केंद्र के माध्यम से कर सकते हैं।
बीज मिनी किट योजना के तहत आमतौर पर नई और उन्नत किस्मों के बीज किसानों को रियायती दर पर या मुफ्त में दिए जाते हैं, जिससे वे नई किस्मों को आजमा सकें। डेमोंस्ट्रेशन कंपोनेंट के तहत खेतों में नई तकनीक दिखाने वाले प्रदर्शन प्लॉट भी लगाए जाते हैं, जिन्हें देखकर आसपास के किसान भी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
गुजरात में हर साल मूंगफली, कपास और सोयाबीन जैसी नकदी खरीफ फसलों की बड़ी मात्रा में खेती होती है, और MSP पंजीयन की समय-सीमा बढ़ने से उन किसानों को भी मौका मिलेगा जो पहले किसी कारण से पंजीयन नहीं करा पाए थे।
मूंगफली किसानों के लिए यह राहत खासतौर पर अहम मानी जा रही है, क्योंकि सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के बड़े हिस्से में मूंगफली ही मुख्य खरीफ फसल है। फसल कटाई और सफाई में लगने वाले समय को देखते हुए किसान संगठन लंबे समय से पंजीयन की तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
सरकार का कहना है कि MSP पर पंजीयन कराने वाले किसानों को बाद में सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने के लिए एक तय समय-सीमा भी दी जाती है, इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत से उपज निकलते ही पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर लें।
कृषि विभाग के मुताबिक पंजीयन के समय किसानों को अपनी जमीन का रिकॉर्ड, बैंक खाता और फसल का रकबा सही-सही दर्ज कराना जरूरी है, क्योंकि इसी जानकारी के आधार पर आगे खरीद केंद्र पर उपज तौलकर भुगतान किया जाता है। किसी भी गलती की स्थिति में भुगतान में देरी हो सकती है।
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