राज्य कृषि समाचार (State News)पशुपालन (Animal Husbandry)

पशुपालक बाढ़ से पशुओं को कैसे बचाएँ

लेखक- डॉ. अलका सुमन, डॉ. अंचल केशरी, डॉ. आदेश कुमार, डॉ. शशि टेकाम एवं डॉ. रश्मि कुलेश, नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर

31 जुलाई 2025, भोपाल: पशुपालक बाढ़ से पशुओं को कैसे बचाएँ – भारत में बाढ़ एक सामान्य प्राकृतिक आपदा है, जो हर वर्ष अनेक राज्यों में भारी तबाही मचाती है। इस आपदा से मानव जीवन के साथ-साथ पशुधन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ पशुपालन आजीविका का मुख्य स्रोत होता है, वहाँ बाढ़ से पशुओं की जान पर खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसलिए पशुपालकों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे बाढ़ की स्थिति में अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए समय रहते उचित तैयारियाँ करें। इस लेख में हम यह समझेंगे कि पशुपालक बाढ़ से अपने पशुओं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

1. बाढ़ पूर्व तैयारी:

बाढ़ की स्थिति आने से पहले ही पशुपालकों को कुछ जरूरी सावधानियाँ और तैयारियाँ कर लेनी चाहिए ताकि समय पर जान-माल की हानि न हो। बाढ़ पूर्व तैयारी में निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:


• उच्च स्थान का चयन: पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए पहले से ही किसी ऊँचे और सुरक्षित स्थान की पहचान कर लें, जहाँ बाढ़ का पानी न पहुँच सके।
• अस्थायी आश्रय की व्यवस्था: तिरपाल, बांस या अन्य सामग्री से एक अस्थायी शरणस्थल तैयार रखें जहाँ आपातकालीन स्थिति में पशुओं को ले जाया जा सके।
• चारा और पानी का भंडारण: कम से कम 7-10 दिनों के लिए सूखा चारा और स्वच्छ पीने के पानी का भंडारण कर लें, ताकि बाढ़ के दौरान पशुओं को भोजन और पानी की कमी न हो।
• पशु चिकित्सा किट तैयार रखें: आवश्यक दवाइयाँ, फर्स्ट एड किट, और पशुओं के टीकाकरण की व्यवस्था पहले से कर लें।
• पहचान चिन्ह: पशुओं पर पहचान के लिए टैग या पेंट से कोई निशान लगा दें, जिससे बिछुड़ने की स्थिति में उन्हें आसानी से पहचाना जा सके।
• स्थानीय प्रशासन से संपर्क: बाढ़ की संभावना होने पर स्थानीय प्रशासन या पशुपालन विभाग से संपर्क बनाए रखें और उनके दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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2. बाढ़ के दौरान की सावधानियाँ:

जब बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, तब घबराने की बजाय सतर्कता और सही निर्णय लेना बहुत जरूरी होता है। बाढ़ के दौरान पशुओं की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ अपनानी चाहिए:

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• पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें: यदि संभव हो, तो पहले से चिन्हित ऊँचे और सुरक्षित स्थान पर पशुओं को तुरंत ले जाएँ।
• भीड़भाड़ से बचें: पशुओं को एक साथ बहुत अधिक संख्या में एक जगह पर न रखें, इससे भगदड़ या चोट की आशंका हो सकती है।
• भोजन और पानी की निगरानी: पशुओं को समय-समय पर सूखा चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएँ। बाढ़ का पानी अक्सर दूषित होता है, जिससे बीमारी फैल सकती है।
• बिजली के उपकरणों से दूरी रखें: जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के उपकरण या तारों से दूर रहें, जिससे करंट लगने का खतरा न हो।
• पशुओं की निगरानी करें: पशु भयभीत हो सकते हैं, इसलिए उन पर लगातार नजर रखें और शांत वातावरण बनाए रखें।
• बीमार पशु को अलग रखें: यदि कोई पशु बीमार हो जाए तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखें और नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
• स्थानीय चेतावनियों पर ध्यान दें: प्रशासन द्वारा जारी की गई चेतावनियों और दिशा-निर्देशों का पालन करें।

3. बाढ़ के बाद की देखभाल:

बाढ़ समाप्त होने के बाद भी पशुओं की देखभाल में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि इस समय कई प्रकार की बीमारियों और संक्रमणों का खतरा बना रहता है। पशुओं की स्थिति की जांच और उनके वातावरण की सफाई बेहद आवश्यक होती है। बाढ़ के बाद निम्नलिखित देखभाल करें:

• स्वास्थ्य जांच कराएँ: पशुओं की तुरंत स्वास्थ्य जांच कराएँ और यदि कोई बीमारी या कमजोरी दिखाई दे, तो पशु चिकित्सक से उपचार करवाएँ।
• साफ-सफाई करें: पशुओं के रहने के स्थान को अच्छे से साफ करें, कीचड़, गंदगी और दूषित पानी को हटाकर उसे सूखा और स्वच्छ बनाएं।
• चारा और पानी की गुणवत्ता जांचें: सड़ा-गला या गीला चारा न दें। पीने का पानी स्वच्छ और उबला हुआ हो, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
• बीमारियों से बचाव: टीकाकरण कराएँ और कीड़ों या मच्छरों से बचाव के लिए छिड़काव करें।
• मानसिक स्थिति का ध्यान रखें: बाढ़ से पशु भी तनाव में आ सकते हैं, इसलिए उन्हें शांत और सुरक्षित माहौल दें।
• पुनर्वास योजना बनाएँ: यदि पशुओं को अन्यत्र ले जाया गया था, तो उन्हें धीरे-धीरे उनके मूल स्थान पर वापस लाएं और उनकी दिनचर्या सामान्य करने की कोशिश करें।

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