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राज्य कृषि समाचार (State News)

खारी जमीन पर झींगा पालन से हरियाणा के किसान श्यामपाल चौधरी कमा रहे सालाना 17 लाख रुपये

23 सितंबर 2026, झज्जर(हरियाणा): खारी जमीन पर झींगा पालन से हरियाणा के किसान श्यामपाल चौधरी कमा रहे सालाना 17 लाख रुपये – खारी और बंजर मानी जाने वाली जमीन पर झींगा (श्रिंप) पालन कर हरियाणा के झज्जर जिले के कुटाणी गांव के किसान श्यामपाल चौधरी अब सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर रहे हैं। भाथेड़ा क्षेत्र में करीब दो हेक्टेयर खारे पानी वाली जमीन पर तालाब बनाकर वे बीते दो साल से झींगा पालन कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिली मदद से हुई थी।

पारंपरिक खेती नहीं हो पा रही थी, तालाब बनाए

श्यामपाल की जमीन में खारापन इतना ज्यादा था कि गेहूं-धान जैसी पारंपरिक फसलें ठीक से नहीं हो पाती थीं। उन्होंने बताया कि खारे पानी के कारण उनकी जमीन का उपयोग पारंपरिक खेती के लिए आसानी से नहीं हो पा रहा था, इसलिए उन्होंने जमीन के वैकल्पिक इस्तेमाल का रास्ता तलाशा।

मत्स्य विभाग से तालाब निर्माण और झींगा पालन की तकनीकी ट्रेनिंग लेने के बाद श्यामपाल और उनकी पत्नी मीना चौधरी ने तालाबों में खारे पानी वाले झींगे पालने शुरू किए। इसमें करीब 40 लाख रुपये का शुरुआती निवेश लगा, जिसमें तालाब निर्माण, बीज और शुरुआती संसाधन शामिल थे।

दो साल में उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़े

साल 2024-25 में उनके तालाबों से करीब 18 टन झींगा उत्पादन हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 20 टन तक पहुंच गया। बाजार में यह झींगा 380 से 480 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर बिक रहा है, जिससे उन्हें सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है।

श्यामपाल कहते हैं, “जो जमीन कभी चिंता का कारण थी, वही आज मेरी आर्थिक मजबूती की नींव बन गई है।” स्थानीय स्तर पर उनकी सफलता को देखकर क्षेत्र के दूसरे किसान भी खारी जमीन पर झींगा पालन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

तकनीकी सहयोग से मिली मजबूती

श्यामपाल बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें पानी की गुणवत्ता जांचने, तालाब की गहराई तय करने और बीज डालने के सही समय जैसी बारीकियों की जानकारी नहीं थी। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बार-बार फार्म पर आकर उन्हें और उनकी पत्नी मीना को यह तकनीकी मार्गदर्शन दिया, जिससे उत्पादन साल दर साल बेहतर होता गया।

खारे पानी में झींगा पालन को अभी हरियाणा में अपेक्षाकृत नया विकल्प माना जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाली तकनीकी और वित्तीय मदद के चलते जिले के कई किसान अब इस मॉडल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। श्यामपाल का कहना है कि सही प्रशिक्षण और नियमित निगरानी मिले तो खारी जमीन भी परंपरागत खेती से कहीं ज्यादा मुनाफा दे सकती है।

आम तौर पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में झींगा पालन को तटीय राज्यों तक सीमित माना जाता रहा है, लेकिन बोरवेल और नहरी सिंचाई से प्रभावित हुई खारी जमीन पर भी यह मॉडल कामयाब हो सकता है, बशर्ते पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होती रहे और तालाबों का रखरखाव ठीक से किया जाए। श्यामपाल की तरह के उदाहरण आसपास के गांवों के लिए एक जीवंत प्रशिक्षण केंद्र का काम कर रहे हैं, जहां नए किसान सीधे खेत पर जाकर तकनीक सीख सकते हैं।


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