राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्रीन हाउस में टमाटर की खेती से किसानों को सालभर आय का प्रमुख स्रोत

लेखक- शिवानी , दिव्यांशी दीक्षित, विवेक यादव, फल विज्ञान विभाग , उद्यान महाविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय , कानपुर , ( उत्तर प्रदेश )

07 जनवरी 2026, भोपाल: ग्रीन हाउस में टमाटर की खेती से किसानों को सालभर आय का प्रमुख स्रोत – भारतीय कृषि लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार–चढ़ाव पर निर्भर रही है। टमाटर जैसी नकदी फसल, जिसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है, खुले खेतों में उगाने पर अक्सर किसानों के लिए घाटे का सौदा बन जाती है। कभी अत्यधिक उत्पादन से दाम गिर जाते हैं, तो कभी मौसम की मार पूरी फसल बर्बाद कर देती है। ऐसे समय में ग्रीनहाउस में टमाटर की खेती किसानों के लिए आशा की एक मजबूत किरण बनकर सामने आई है, जो उत्पादन, गुणवत्ता और आय—तीनों में स्थिरता प्रदान करती है।

ग्रीनहाउस खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें प्रकृति पर निर्भरता कम हो जाती है। नियंत्रित तापमान और नमी के कारण टमाटर के पौधे स्वस्थ रहते हैं और लंबे समय तक फल देते हैं। पौधों पर लगने वाले फल आकार, रंग और गुणवत्ता में लगभग एक समान होते हैं, जिससे बाजार में उनकी मांग बढ़ जाती है। खुले खेतों में जहाँ टमाटर बारिश, पाले या तेज गर्मी से प्रभावित हो जाता है, वहीं ग्रीनहाउस में किसान इन जोखिमों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। 

आज के समय में उपभोक्ता न केवल सस्ती सब्जी, बल्कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन चाहता है। ग्रीनहाउस में उगाए गए टमाटर कम रसायनों के उपयोग से तैयार होते हैं, जिससे वे स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर माने जाते हैं। यही कारण है कि शहरी बाजारों, बड़े खुदरा स्टोरों, होटलों और प्रोसेसिंग उद्योगों में ऐसे टमाटरों की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे किसानों को सीधे बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ती है। ग्रीनहाउस टमाटर खेती से जल और उर्वरकों की बचत भी एक बड़ा लाभ है। ड्रिप सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन के कारण कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होता है। वर्तमान समय में, जब जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, यह तकनीक टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे भविष्य की खेती पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कई राज्यों में यह देखा गया है कि ग्रीनहाउस टमाटर अपनाने वाले किसान केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि सीधे व्यापारियों, सुपरमार्केट और निर्यातकों से जुड़ रहे हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसान को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलता है। कुछ प्रगतिशील किसान चेरी टमाटर और रंगीन टमाटर जैसी विशेष किस्में उगाकर अतिरिक्त लाभ भी कमा रहे हैं। सरकारी नीतियाँ भी इस दिशा में सहायक साबित हो रही हैं।

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राष्ट्रीय बागवानी मिशन और अन्य योजनाओं के तहत ग्रीनहाउस निर्माण पर दी जाने वाली सब्सिडी ने छोटे और मध्यम किसानों के लिए इस तकनीक को सुलभ बनाया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। आज जब खेती को घाटे का व्यवसाय मानकर युवा वर्ग इससे दूर होता जा रहा है, ग्रीनहाउस टमाटर जैसी आधुनिक खेती पद्धतियाँ कृषि की छवि बदलने का कार्य कर रही हैं। यह तकनीक यह साबित करती है कि सही योजना, तकनीक और बाजार से जुड़ाव के साथ खेती भी एक सम्मानजनक और लाभदायक व्यवसाय बन सकती है। अंततः यह कहा जा सकता है कि ग्रीनहाउस में टमाटर की खेती केवल एक नई कृषि तकनीक नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। यह किसानों को मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं से बचाते हुए स्थायी आय प्रदान करती है।  इस तकनीक को व्यापक स्तर अपनाया जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

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