जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण की ओर ग्राम बामला की प्रेरक पहल
16 मार्च 2026, छिंदवाड़ा: जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण की ओर ग्राम बामला की प्रेरक पहल – कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत ग्राम बामला में जैविक खेती को बढ़ावा देने और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.आर.के.झाड़े ने विभिन्न ग्रामों से आई लगभग दो सौ महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें जैविक कृषि, जैविक खाद निर्माण और बकरी पालन के मॉडल पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि सामूहिक प्रयासों से ग्राम बामला को पूरी तरह जैविक ग्राम के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र चंदन गांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी.सी.श्रीवास्तव ने भी महिलाओं के प्रयासों को सराहते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने ‘श्री अन्न’ से बने पारंपरिक व्यंजनों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोटे अनाज न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस अवसर पर नाबार्ड की डीडीएम श्रीमती श्वेता सिंह ने महिलाओं के माध्यम से किए जा रहे जैविक खेती और कृषि आधारित आजीविका के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि नाबार्ड ऐसे ग्रामों और समूहों को प्रोत्साहित करता है जो नवाचार और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाकर ग्रामीण विकास में योगदान दे रहे हैं। उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को नाबार्ड की ओर से सम्मानित भी किया गया।
ग्राम बामला में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सप्ताह भर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसका समापन महिला सम्मेलन के रूप में हुआ। कार्यक्रम में रिलायंस फाउंडेशन के डीपीएम श्री मनोज बिसेन ने जलवायु मित्र श्री छोटेलाल चौरे और उनकी टीम के प्रयासों को सकारात्मक पहल बताते हुए सराहा। कार्यक्रम में जमस के निदेशक महेंद्र खरे की उपस्थिति में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र और सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। ग्राम सहयोगी समूह (जीएसएस) के श्री कन्हैयालाल पटेल ने आभार व्यक्त किया।
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