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राज्य कृषि समाचार (State News)

कम वर्षा को देखते हुए रबी में कम पानी वाली फसलों को दें प्राथमिकता

23 सितंबर 2026, उज्जैन: कम वर्षा को देखते हुए रबी में कम पानी वाली फसलों को दें प्राथमिकता – कृषक संगोष्ठी में फार्मर आईडी, ई-टोकन से उर्वरक उठाव और फसल विविधीकरण पर किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी उज्जैन 22 सितंबर । कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आत्मा योजना अंतर्गत मंगलवार, को विकासखंड तराना के ग्राम रामपुरा में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।  संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व मंडी अध्यक्ष श्री शोभल सिंह ने की।

कार्यक्रम में संयुक्त संचालक कृषि श्री आर.पी.एस. नायक विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कृषि विज्ञान केंद्र उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ए.के. दीक्षित तथा उपसंचालक कृषि एवं परियोजना संचालक आत्मा श्री के.एस. कैन सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ए.के. दीक्षित ने किसानों को आगामी रबी मौसम की तैयारियों, फसल चयन तथा उपयुक्त प्रजातियों के चयन के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किसानों से स्थानीय कृषि परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों एवं मौसम की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन करने का आह्वान किया।*कम पानी वाली फसलों और फसल विविधीकरण पर जोर*सहायक संचालक कृषि श्री कमलेश कुमार राठौर ने वर्तमान में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए आगामी रबी मौसम में कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के अनुरूप फसल योजना तैयार करना आवश्यक है। साथ ही किसानों को फसल विविधीकरण अपनाकर खेती में जोखिम कम करने की जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों को ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण एवं उठाव की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि किसान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही फार्मर आईडी की उपयोगिता एवं विभिन्न कृषि योजनाओं में इसके महत्व के संबंध में भी किसानों को अवगत कराया गया।*प्राकृतिक खेती के साथ मिश्रित खेती अपनाने की सलाह*उपसंचालक कृषि एवं परियोजना संचालक आत्मा श्री के.एस. कैन ने बदलती मौसम परिस्थितियों को देखते हुए किसानों से पारंपरिक खेती के साथ फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, मिश्रित खेती तथा उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को अपनाने की अपील की।

उन्होंने वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया।संयुक्त संचालक कृषि श्री आर.पी.एस. नायक ने कहा कि फसल विविधीकरण और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फसल चयन से खेती में जोखिम को कम करने तथा उत्पादन एवं आय को अधिक स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों को कृषि की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।सहायक कृषि अधिकारी श्री बनसिंह वर्मा ने प्राकृतिक खेती के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती को प्रभावी रूप से अपनाने के लिए मिश्रित खेती एवं कृषि आधारित विविध गतिविधियों को बढ़ावा देना उपयोगी है।कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी तराना श्री दिनेश डोर, क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी शुभम, बीटीएम श्री नीरज सिलावट, विनीत पाटीदार सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। संगोष्ठी के दौरान किसानों ने कृषि से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों से चर्चा कर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया I

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