मध्यप्रदेश में किसान हेल्पलाइन लॉन्च: अब कृषकों को एक कॉल पर मिलेगा त्वरित मार्गदर्शन, सरकार ने बढ़ाया डिजिटल फोकस
01 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में किसान हेल्पलाइन लॉन्च: अब कृषकों को एक कॉल पर मिलेगा त्वरित मार्गदर्शन, सरकार ने बढ़ाया डिजिटल फोकस – डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के दौरान 16 विभाग समन्वित रूप से किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं। यह एक समग्र पहल है, जिसमें कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य विभागों को जोड़कर किसानों के विकास के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला के माध्यम से अधिकारी और कर्मचारी समर्पण भाव से किसानों के लिए कार्य करें और नई तकनीकों व नवाचारों को अपनाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया है।
राजधानी भोपाल स्थित रवींद्र भवन में आयोजित कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि किसान अब टोल फ्री नंबर 155253 पर कॉल कर खेती से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि कर्मयोगियों से आह्वान किया कि वे किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समर्पण भाव से कार्य करें। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए काम करते हुए नवाचार, संवेदनशीलता और सेवा भाव बनाए रखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता से अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों को प्रति लीटर दूध पर 7 से 8 रुपये तक अधिक मूल्य मिल रहा है।
सिंचाई विस्तार से बढ़ी फसल उत्पादन क्षमता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रबी फसल वर्षा पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब नहरों और बिजली सुविधाओं के विस्तार से खेत-खेत तक सिंचाई पहुंची है। इसके परिणामस्वरूप किसान अब वर्ष में दो के बजाय तीन फसलें लेने लगे हैं। राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जन कर रही है और उड़द की फसल पर भी समर्थन मूल्य देना शुरू किया गया है।
एग्री वेस्ट मैनेजमेंट बना अतिरिक्त आय का जरिया
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान अब एग्री वेस्ट मैनेजमेंट अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसल अवशेष जैसे मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर किसान लाभ कमा रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने का आह्वान किया और इजरायल जैसे देशों के उदाहरण दिए, जहां सीमित संसाधनों में भी आधुनिक खेती की जा रही है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है, जिससे मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिलों को लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत लागत वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
डिजिटल पहल से किसानों को मिलेगा त्वरित समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल साधनों का उपयोग किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। किसान हेल्पलाइन जैसी पहल से अब किसानों को घर बैठे मार्गदर्शन मिलेगा और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल, वरिष्ठ अधिकारी और प्रदेश भर से आए कृषि कर्मयोगी उपस्थित रहे। सचिव कृषि निशांत वरवड़े ने बताया कि प्रदेश के सभी 55 जिलों से 16 विभागों के 1627 अधिकारियों और कर्मचारियों को इस कार्यशाला में शामिल किया गया है, जहां किसानों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन किया जा रहा है।
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