राज्य कृषि समाचार (State News)

भावान्तर योजना में किसानों को मिली राहत

13 नवंबर 2025, इंदौर: भावान्तर योजना में किसानों को मिली राहत – मध्य प्रदेश में भावांतर योजना को लेकर किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मंडियों में इन दिनों किसानों की भारी भीड़ यह दर्शा रही है कि यह योजना किसानों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।

राज्य में अब तक 9,36,352 कृषकों द्वारा योजना अंतर्गत पंजीयन कराया जा चुका है। योजना 24 अक्टूबर 2025 से 6 नवंबर 2025 तक सक्रिय रही, जिसके अंतर्गत प्रदेश की 243 मंडियों एवं उप मंडियों में 1,44,180 किसानों द्वारा 24,67,100 क्विंटल सोयाबीन का विक्रय किया गया। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि किसान इस योजना से जुड़ने में गहरी रुचि ले रहे हैं।

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भावान्तर योजना के तहत सर्वाधिक सोयाबीन की आवक गंजबासौदा, देवास, उज्जैन, इंदौर और आगर की मंडियों में दर्ज की गई। वहीं, रतलाम जिले की आलोट मंडी में 6 नवंबर 2025 को सोयाबीन की सर्वाधिक बोली ₹6,777 प्रति क्विंटल रही। सभी मंडियों में विपणन की कार्यवाही पूरी तरह सुचारू और पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है।

भावांतर मॉडल रेट आने से कृषि मंडियों में व्याप्त अनिश्चितता का माहौल अब समाप्त हो गया है। किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में यह योजना एक नए युग की शुरुआत है। अब उन अन्य कृषि जिंसों पर भी, जो मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही हैं, किसानों को भावांतर योजना के माध्यम से समर्थन मूल्य का लाभ मिल सकेगा।

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यह समझना आवश्यक है कि जब कोई सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जन करती है, तो उस पर 25 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त खर्च आता है। इसमें स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, नमी की हानि (moisture loss), सुरक्षा, चोरी, परिवहन एवं अपव्यय (wastage) जैसी लागतें शामिल होती हैं। ये सभी खर्च अंततः प्रदेश के नागरिकों पर आर्थिक बोझ के रूप में पड़ते हैं।

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भावान्तर योजना के माध्यम से इस आर्थिक बोझ को कम करने के साथ-साथ किसानों को भी लाभान्वित किया जा रहा है। वर्तमान में मूल्य अंतर भुगतान योजना (Price Deficiency Payment Scheme – PDPS) के तहत केंद्र सरकार समर्थन मूल्य के अंतर का 15% वहन करती है, जबकि शेष राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है। इससे सरकारों पर अनावश्यक भंडारण और प्रबंधन खर्च कम होता है तथा किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में मूल्य का अंतर राशि प्राप्त होती है।

सरकारें गेहूं और धान का उपार्जन इसलिए करती हैं क्योंकि यह अनाज पीडीएस (Public Distribution System) के तहत 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त अनाज वितरण के लिए आवश्यक होता है। लेकिन सोयाबीन, तिलहन या दलहन जैसी फसलों के लिए यह प्रणाली व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में भावान्तर योजना जैसी पहल न केवल व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती हैं, बल्कि किसानों को भी सीधे और पारदर्शी आर्थिक लाभ प्रदान करती हैं।

भावान्तर योजना ने किसानों के बीच विश्वास और उत्साह का माहौल बनाया है। यह योजना न केवल किसानों को मंडियों में बेहतर मूल्य दिलाने में मदद कर रही है, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही है। सरकार की यह पहल किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।

                                       भावान्तर  योजना के मॉडल रेट ( रु में )

                                         7 /11 /25   –  4020    
                                         8 /11 /25  –   4033  
                                        9  /11 /25   –  4036
                                       10 /11 /25   –  4036  
                                       11 /11 /25    – 4056
                                       12 /11 /25   –  4077  

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