Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में AI से सशक्त होंगे किसान और कृषि प्रशासन, 13 जिलों के अधिकारियों को मिली ट्रेनिंग  

27 सितंबर 2026, जयपुर: राजस्थान में AI से सशक्त होंगे किसान और कृषि प्रशासन, 13 जिलों के अधिकारियों को मिली ट्रेनिंग – राजस्थान के कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कृषि विभाग द्वारा पहल की जा रही है। इसी क्रम में 13 जिलों के कृषि अधिकारियों के लिए पंत कृषि भवन के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें Wadhwani Institute for Artificial Intelligence (Wadhwani AI) के विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बारे में प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को AI की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ कृषि प्रशासन, योजना निर्माण, निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और किसान सेवाओं में इसके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को समझाना है। विभाग का लक्ष्य AI को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखकर कृषि व्यवस्था और किसान सेवा वितरण का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

किसानों तक पहुंचेगा AI का लाभ

कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में AI की उपयोगिता विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है। किसानों तक इस तकनीक का प्रभावी हस्तांतरण आने वाले समय में कृषि को अधिक स्मार्ट, लाभकारी, टिकाऊ और जोखिम-रोधी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज के विपणन तक कृषि की पूरी वैल्यू चेन में AI आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल की स्थिति का आकलन, कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान, सिंचाई एवं संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

मौसम और फसल संबंधी निर्णय होंगे अधिक सटीक

AI और Data Analytics के माध्यम से कृषि, मौसम और फसल से जुड़े बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को अधिक सटीक, स्थानीय और समयबद्ध सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। मौसम के पूर्वानुमान और खेत में फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिल सकेगी। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित करने, जोखिम कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। AI आधारित प्रणालियों के माध्यम से फसल की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान तथा संभावित उत्पादन का आकलन भी अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

फसल बीमा में बढ़ सकती है पारदर्शिता

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में भी AI और आधुनिक डेटा आधारित तकनीकों की भूमिका हो सकती है। फसल की स्थिति और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के आकलन में रिमोट सेंसिंग, इमेज एनालिटिक्स, ड्रोन एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर फसल क्षति मूल्यांकन को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। इससे फसल नुकसान के आकलन, दावों के निस्तारण और योजना की निगरानी में दक्षता बढ़ेगी तथा किसानों को बीमा योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

AI आधारित कृषि प्रशासन का बनेगा संस्थागत ढांचा

राजस्थान कृषि विभाग AI को केवल प्रशिक्षण अथवा प्रायोगिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए कृषि प्रशासन और किसान सेवा वितरण की व्यापक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। AI आधारित नवाचारों, परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों के विकास, परीक्षण, उपयोग और विस्तार के लिए मजबूत Institutional Framework तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से कृषि विभाग, तकनीकी संस्थानों, विशेषज्ञों, शोध संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

Raj Kisan Portal होगा और स्मार्ट

किसानों को कृषि योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने वाले Raj Kisan Portal को भी AI आधारित तकनीकों से और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। AI और Data Analytics के माध्यम से किसान की आवश्यकता, फसल, क्षेत्र और प्रोफाइल के अनुरूप योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

इसके साथ आवेदन प्रक्रिया, सेवा वितरण, लंबित प्रकरणों और संभावित समस्याओं की पहचान में भी सहायता मिलेगी। इससे One-to-One Farmer Service Delivery की दिशा में आगे बढ़ते हुए किसान को उसकी आवश्यकता के अनुसार लक्षित, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना संभव होगा।

AI आधारित कृषि नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा

राजस्थान में Artificial Intelligence, Machine Learning और Data Analytics आधारित समाधानों को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारपूर्ण तकनीकी मॉडल विकसित करना और उन्हें खेत स्तर तक पहुंचाना है।

इनमें फसल एवं मौसम आधारित सलाह, कीट एवं रोगों की समयपूर्व पहचान, फसल उत्पादन एवं उपज का पूर्वानुमान, सिंचाई और कृषि संसाधनों का दक्ष उपयोग, फसल क्षति का त्वरित आकलन, कृषि योजनाओं की बेहतर निगरानी, बाजार एवं मूल्य संबंधी जानकारी तथा किसान शिकायतों एवं सेवाओं का समयबद्ध निस्तारण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

किसान होंगे तकनीकी बदलाव के केंद्र में

विभाग का उद्देश्य AI का उपयोग केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि किसान को इस Technology-driven Transformation के केंद्र में रखना है। AI आधारित समाधानों के माध्यम से किसानों को फसल एवं मौसम संबंधी सलाह, कीट एवं रोगों की पहचान, कृषि समस्याओं का समाधान, योजनाओं की जानकारी और बाजार संबंधी आवश्यक सूचनाएं सरल, स्थानीय और समयबद्ध रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। तकनीकी समाधान तभी प्रभावी होंगे, जब वे किसान की भाषा, स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इसलिए AI आधारित सेवाओं के साथ किसानों और ग्रामीण स्तर के कार्मिकों में डिजिटल जागरूकता एवं तकनीकी क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

38 संगठनों के साथ MoU

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कृषि विभाग ने कुल 38 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें टैफे–जेफॉर्म सर्विसेज, मणिपाल यूनिवर्सिटी, वाधवानी AI, श्री रामशान्ताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केंद्र, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स और 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित अन्य संगठन शामिल हैं।

इन साझेदारियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार और किसानों की आय में सतत वृद्धि के लिए काम किया जाएगा। सभी संगठन एक मंच पर मिलकर कार्य करेंगे और प्रत्येक तिमाही में MoU संगठनों की बैठक में कार्य प्रगति पर चर्चा की जाएगी। जिला स्तर पर सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें जिला प्रशासन की अहम भागीदारी होगी।

इन समझौता ज्ञापनों से प्रदेश के किसानों को प्राकृतिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे खेती की लागत घटाने, उत्पादकता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण को बढ़ावा देने में सहायता मिलने की उम्मीद है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान और जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन साझेदारियों का लाभ देने पर जोर है। प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन, तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर सहयोग के माध्यम से कृषि को अधिक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture