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राज्य कृषि समाचार (State News)

उदयपुर में विश्व जल दिवस पर कार्यक्रम, जल संरक्षण और लैंगिक समानता पर दिया जोर

23 मार्च 2026, उदयपुर: उदयपुर में विश्व जल दिवस पर कार्यक्रम, जल संरक्षण और लैंगिक समानता पर दिया जोर – महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (सीटीएई) के मृदा एवं जल अभियांत्रिकी विभाग ने विश्व जल दिवस के अवसर पर “जल और लैंगिक समानता” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम सीटीएई फार्म स्थित सुंदर बाई की बावड़ी पर आयोजित हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह ने कहा कि भारत में विश्व के केवल 4 प्रतिशत जल संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि जनसंख्या सबसे अधिक है, ऐसे में जल का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों पर निरंतर अनुसंधान कर रहा है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. बसंत माहेश्वरी (ऑस्ट्रेलिया इंडिया वाटर सेंटर, वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी) ने गांव स्तर पर जलभंडार पुनर्भरण और भूजल प्रबंधन (MARVI) को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा और जल की गुणवत्ता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

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सीटीएई के अधिष्ठाता डॉ. सुनील जोशी ने बताया कि सेंसर आधारित सिंचाई तकनीक अपनाने से 30 से 70 प्रतिशत तक जल की बचत संभव है और इस दिशा में विश्वविद्यालय लगातार कार्य कर रहा है। क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.एस. लखावत ने फलदार वृक्षारोपण और कम पानी में अधिक उपज देने वाली खेती पर बल दिया।

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डॉ. के.के. यादव ने सिंचाई जल प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत जल संरक्षण और भूजल गुणवत्ता सुधार के कार्यों की जानकारी दी। वहीं डॉ. मनजीत सिंह ने विभाग में संचालित परियोजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन, हाइड्रोपोनिक्स और ऑटोमेशन तकनीकों के उपयोग पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत जल पूजन से हुई। इसके बाद छात्रों एवं कर्मचारियों ने सुंदर बाई की बावड़ी की साफ-सफाई की तथा एनसीसी कैडेट्स ने पोस्टर के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर डॉ. आर.सी. पुरोहित, डॉ. एच.के. मित्तल, डॉ. सांवल सिंह, डॉ. नवीन जैन, डॉ. बी.जी. छीपा, इंजीनियर बलराम, डॉ. सचिन वांडकर, इंजीनियर कालू सिंह और डॉ. योगिता दशोरा सहित अन्य उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने जल संरक्षण की शपथ ली।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. उर्मिला ने किया।

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