ईसीडीएस ने इंदौर में किया ‘सस्टेनएक्स इंडिया 2026 का आयोजन
15 फरवरी 2026, इंदौर: ईसीडीएस ने इंदौर में किया ‘सस्टेनएक्स इंडिया 2026 का आयोजन – ईसीडीएस द्वारा गत दिनों इंदौर में सस्टेनएक्स इंडिया 2026 का आयोजन किया गया। जिसमें ईसीडीएस के सीईओ श्री राजेश भारद्वाज, साउथ कोरियन कंपनी टीएन सॉल्यूशंस के सीईओ डॉ यांग ग्वांग वुन, आइनस्काई के सीईओ श्री ली जाए चियान और डायरेक्टर इंडिया एक्सपेंशन श्री वूसिओक शुंग, पर्यावरण विशेषज्ञ श्री विजय जड़धारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। देश में पहली बार रेस्पोंसिबल डेवलपमेंट के अलग-अलग आयामों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया , जिसमें वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल विकसित करने,किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित करने और विदेशी टेक्नोलॉजी को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार लोकलाइज़ और को-डेवलप करने पर ज़ोर दिया गया।
‘सस्टेनएक्स इंडिया 2026’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में सस्टेनेबिलिटी अब केवल नीतिगत चर्चा या भविष्य की योजना नहीं रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित हो रही एक ठोस और बहुआयामी प्रक्रिया बन चुकी है। इस मंच पर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ-साथ उज्जैन औद्योगिक क्षेत्र में एमपीआईडीसी मेडिकल डिवाइस पार्क के अंतर्गत प्रस्तावित औद्योगिक विकास, कोरियाई एफडीआई के माध्यम से हमारी कंपनी का छह बिज़नेस सेगमेंट में विस्तार और क्लीनटेक, हेल्थकेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा एविएशन स्किल डेवलपमेंट जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों में निवेश की रूपरेखा को भी रेखांकित किया गया। कंपनी द्वारा चरण-1 फैक्ट्री में ₹780 करोड़ तथा चरण-2 में ₹1250 करोड़ के निवेश की योजना प्रस्तुत की गई, जिससे मध्य प्रदेश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय रोज़गार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इसी क्रम में ईसीडीएस और एचएलबी पैनेजिन के बीच हुई एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की भी जानकारी दी गई, जिसका उद्देश्य पेप्टाइड नुक्लेइक एसिड (पीएनए) आधारित अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से भारत में कैंसर और संक्रामक रोगों के त्वरित, सटीक और विश्वसनीय निदान को बढ़ावा देना है। इस सहयोग से ईसीडीएस की डायग्नोस्टिक क्षमताओं का विस्तार होगा, जिसमें तेज़ टेस्टिंग सॉल्यूशंस, नेक्स्ट-जेनरेशन डायग्नोस्टिक पैनल का विकास, क्षमता-निर्माण तथा लिक्विड बायोप्सी, टिश्यू बायोप्सी और संक्रमण जांच जैसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग शामिल हैं। यह पहल भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को वैश्विक तकनीकों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री भारद्वाज ने बताया कि, “सस्टेनएक्स इंडिया 2026 का उद्देश्य केवल सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवहारिक तकनीकों और समाधानों को सामने लाना है, जो भारत की वास्तविक ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप हों। मध्य प्रदेश और उज्जैन में हमारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के माध्यम से हमारा उद्देश्य एसएमई को एसएमई के साथ जोड़ना है। हम साउथ कोरियन कंपनी के साथ एआई की एडवांस तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं, जो 2028 में होने वाले सिंहस्थ में फेस रिकॉग्निशन तकनीक और क्राउड मैनेजमेंट में मददगार साबित होगा। वेस्ट-टू-वेल्थ, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और लोकल इनोवेशन के ज़रिए हम विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। यह मंच किसानों, उद्योगों और नीति-निर्माताओं को एक साझा विज़न के साथ जोड़ने का कार्य कर रहा है।” कार्यक्रम में मुख्यरूप से उपस्थित साउथ कोरियन कंपनी टीएन सॉल्यूशंस के सीईओ डॉ यांग ग्वांग वुन, आइनस्काई के सीईओ श्री ली जाए चियान और डायरेक्टर इंडिया एक्सपेंशन श्री वूसिओक शुंग ने भी अपने विचार साझा किए।
इस आयोजन में पर्यावरण संरक्षण, कार्बन एमिशन में कमी और रेस्पोंसिबल डेवलपमेंट से जुड़े समाधान एक साथ प्रस्तुत किए गए। इस आयोजन के नैनो इलेक्ट्रो स्पिनिंग और नैनोफाइबर आधारित एडवांस फिल्ट्रेशन टेक्नोलॉजी, बायोमास सेलुलोज क्रॉस-लिंक्ड पॉलिमर जैसे सस्टेनेबल मटीरियल सॉल्यूशंस, नेचर-बेस्ड स्किन और पर्सनल केयर उत्पादों के साथ-साथ विदेशी तकनीकों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार लोकलाइज और को-डेवलप करने की रणनीति मुख्य आकर्षण रहे। इस पहल को राज्य सरकार की स्वच्छता और पर्यावरणीय पहलों तथा केंद्र सरकार के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्यों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। श्री जड़धारी के अनुसार भारत की सबसे बड़ी चुनौती तेज़ी से हो रहे विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। वायु प्रदूषण, बढ़ता कार्बन एमिशन और खराब इनडोर एयर क्वालिटी अब सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ चुके हैं। इसी संदर्भ में सस्टेनएक्स इंडिया 2026 में नैनो इलेक्ट्रोस्पिनिंग सिस्टम और नैनोफाइबर-बेस्ड एयर फिल्ट्रेशन मीडिया जैसे समाधानों का प्रदर्शन किया गया। ये तकनीक पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषकों को प्रभावी ढंग से फ़िल्टर कर इनडोर एयर क्वालिटी सुधारने में सक्षम मानी जाती हैं।
कार्यक्रम में पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने और सस्टेनेबल मटीरियल्स को बढ़ावा देने से जुड़े प्रयासों पर भी चर्चा हुई। बायोमास सेल्यूलोज क्रॉस-लिंक्ड पॉलिमर (सीएक्सपी) टेक्नोलॉजी जैसे बायो-बेस्ड समाधानों को प्लास्टिक के इको-फ्रेंडली विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो कार्बन स्टोरेज, कार्बन न्यूट्रलाइजेशन, बायो-सीसीयूएस और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग जैसे क्षेत्रों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। सस्टेनएक्स इंडिया 2026 में वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल के अंतर्गत एग्री-वेस्ट, इंडस्ट्रियल वेस्ट और अन्य बायो-रिसोर्सेज के उपयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया। पराली जैसे कृषि अपशिष्ट को जलाने के बजाय वैल्यू क्रिएशन का हिस्सा बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिससे प्रदूषण में कमी के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए आय-स्रोत विकसित होने की संभावना जताई गई। कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रस्तावित यूनिट को भारत की पहली इंटीग्रेटेड सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार का समर्थन और मंजूरी प्राप्त है। यह यूनिट ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, क्लाइमेट एक्शन और सर्कुलर इकोनॉमी को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय रोजगार, एमएसएमई भागीदारी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देगी। कार्यक्रम में स्वास्थ्य और पर्यावरण के आपसी संबंधों पर भी विशेष चर्चा हुई। नैनोफाइबर और प्राकृतिक मटेरियल से बने कोलेजन पैच, एडवांस्ड स्किनकेयर मास्क्स और नेचर-बेस्ड पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स को केमिकल-हेवी विकल्पों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बताया गया।सस्टेनएक्स इंडिया 2026 के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि इंदौर अब केवल स्वच्छता का ही नहीं, बल्कि सस्टेनेबल इनोवेशन और रेस्पोंसिबल डेवलपमेंट का भी राष्ट्रीय नेतृत्व कर रहा है।
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