झाबुआ जिले में ई-विकास प्रणाली की शुरुआत 15 जनवरी से
12 जनवरी 2026, झाबुआ: झाबुआ जिले में ई-विकास प्रणाली की शुरुआत 15 जनवरी से – झाबुआ जिले में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं किसानों को उर्वरक की समय पर एवं पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई-विकास प्रणाली की शुरुआत की जा रही है, जो 15 जनवरी 2026 से पूर्ण रूप से क्रियाशील होगी। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण को व्यवस्थित, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाएगा। ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत किसानों को पंजीयन के उपरांत उर्वरक प्राप्ति हेतु एक ई-टोकन जारी किया जाएगा, जिसमें किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार एवं मात्रा, वितरण केंद्र, निर्धारित तिथि एवं समय अंकित रहेगा। यह ई-टोकन किसानों को एसएमएस, मोबाइल एप अथवा वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होगा। पंजीकृत किसान निर्धारित तिथि एवं समय पर अपने नजदीकी वितरण केंद्र से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
कलेक्टर नेहा मीना द्वारा प्रदत्त निर्देशों के अनुक्रम में जिले के किसानों को डिजिटल कृषि की दिशा में जोड़ने, उन्हें सशक्त बनाने एवं शासकीय संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन हेतु उप संचालक कृषि , जिला झाबुआ श्री एन.एस. रावत द्वारा जानकारी दी गई कि जिला स्तर पर गत दिनों कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में जिले के समस्त उर्वरक विक्रेताओं (सहकारी एवं निजी संस्था) के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता एवं सुगमता सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली उर्वरक वितरण में अनावश्यक भीड़ को कम करने, लंबी कतारों से किसानों को राहत प्रदान करने तथा पूरी प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है। ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत डिजिटल टोकन के माध्यम से किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार उर्वरक, वितरण केंद्र, तिथि एवं समय की स्पष्ट जानकारी प्राप्त होगी।
श्री रावत ने बताया कि ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत उर्वरक वितरण को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने हेतु प्रत्येक वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे शासकीय निगरानी और नियंत्रण सुदृढ़ होगा। इस प्रणाली से किसानों को कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बचत होगी। टोकन आधारित व्यवस्था लागू होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण के माध्यम से उर्वरक की मांग एवं आपूर्ति पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। यह प्रणाली किसानों को आधुनिक तकनीकी साधनों से जोड़ते हुए उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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