कृषकों का परिश्रम एवं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण देश को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त – श्री नरेंद्र सिंह तोमर

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कृषकों का परिश्रम एवं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण देश को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त – श्री नरेंद्र सिंह तोमर

मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्रों की 27 भी जोनल कार्यशाला का समापन

04 अगस्त 2020,भोपाल। कृषकों का परिश्रम एवं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण देश को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त – श्री नरेंद्र सिंह तोमर – मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्रों (कृषि तकनीक के पावर हाउस ) 27 वी जोनल कार्यशाला का समापन समारोह  मैं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में हुआ श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमारे देश के गांव एवं किसानों की ताकत को ना तो मुगल खत्म कर पाए ना ही अंग्रेज हिला पाए और ना ही किसी में इसे तोड़ने की शक्ति है देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की आव्हान पर भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भी गांव और किसानों की अग्रणी भूमिका रहेगी,  श्री तोमर ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका एक कृषि कोतवाल की है वे आपस में  सकारात्मक  प्रतिस्पर्धा करें, कृषि की प्रगति एवं उत्तरोत्तर उन्नति का भाव हर कृषि वैज्ञानिक के मन में हो तो कृषि के विकास के साथ-साथ देश को आगे बढ़ने में कोई नहीं रोक सकेगा, कृषि विज्ञान केंद्र  को अपने कार्य क्षेत्रों की कमजोरियों को चिन्हित करना चाहिए एवं कार्यों को  चुनौतीपूर्ण ढंग से  शीघ्र ही  निदान हेतु रोड मेंप बनाकर कार्य करें,  हमारे देश के  कृषि विज्ञान केंद्रों  एवं वैज्ञानिकों पर देश को आगे ले जाने एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने में अभूतपूर्व योगदान देने का  मौका  प्राप्त हुआ है , इस कार्य हेतु सकारात्मक  एवं सहयोगात्मक रूप से  कार्य करते हुए  गांव का  गरीब  किसान, कर्मचारी  एवं वैज्ञानिक  पर सर्वाधिक  जिम्मेदारी  है  इसके साथ ही खेती के प्रति  लोगों में आकर्षण कैसे बढ़े  इस चुनौती पर भी  हमें  गंभीरता के साथ  कार्य करना होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) जबलपुर द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि कृषकों का परिश्रम एवं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण हमारा देश कृषि क्षेत्र में एक उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया है छत्तीसगढ़ जहां एक और धान का कटोरा है वही मध्यप्रदेश देश में दलहन एवं तिलहन के उत्पादन में अग्रणी भूमिका का निर्वाहन कर रहा है और लगातार 7 साल से कृषि कर्मण अवार्ड हासिल कर रहा है।

आपने कहां की केवीके के काम करने वाले लोग कृषि की प्रगति उन्नति के लिए ही है यह भाव हमारे हर एक के मन में होना चाहिए सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रतिस्पर्धा होना चाहिए , ताकि कृषि के विकास के साथ देश और ऊंचाइयों पर पहुंचे हमारे कृषि विज्ञान केंद्रों के अथक परिश्रम से ही काफी उपलब्धियां अर्जित हुई है  कृषि विज्ञान केंद्रों को क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर समाज के लोगों एवं एनजीओ को जोड़ते हुए बेहतर काम करने की दिशा में सतत बढ़ना होगा प्रधानमंत्री जी की एक महत्वाकांक्षी योजना एवं आह्वान प्रदेश के किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित करने का अभूतपूर्व कार्य बहुत अच्छे से किया गया इस कार्य में किसानों को प्रशिक्षण एवं जागरूकता अभियान चलाकर इसकी आवश्यकता एवं उपयोगिता को किसानों तक पहुंचाना होगा श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के संकट में विजय प्राप्त करने की ताकत कृषि और ग्रामीण भारत के पास ही है कोरोना संकट के दौरान तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद फसल कटाई का काम समय पर हुआ , ग्रीष्मकालीन फसलें भी बोई गई एवं उत्पादन भी बेहतर प्राप्त हुआ, देश के प्रधानमंत्री जी के “वोकल फॉर लोकल ” का नारा दिया वह मूलतः हमारे ग्रामीण व्यवस्था से ही जुड़ा है हमारे गांव में किसानों का ताना-बाना मुगलों ने खत्म करने की कोशिश की अंग्रेजों ने भी स्थित है स्नेह करने का प्रयास किया लेकिन हमारे पूर्वजों ने इसे इतना मजबूत बनाया है की कोई भी ताकत इसे तोड़ नहीं पाई आजाद भारत में आज हमारी ग्रामीण व्यवस्था इतनी मजबूत है निश्चित रूप से आगे भी  इससे भी मजबूत एवं बेहतर होंगी हमारे कृषि वैज्ञानिक बहुत ही बिजनरी हैं वे सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि अन्य सभी क्षेत्रों के बारे में गंभीरता से मंथन करते हैं सोचते हैं जो उनकी महारत है खेती में निरंतर उत्पादन व उत्पादकता बड़े आने वाले कल में खेती के प्रति युवाओं में आकर्षण बड़े यह बहुत आवश्यक है अन्यथा भविष्य में चुनौतियां आएंगी एवं उनसे निपटना मुश्किल होगा शहरीकरण बढ़ रहा है पढ़े-लिखे तबके में भी खेती के प्रति आकर्षण पैदा करें भले ही वे कृषि से जुड़े अन्य कार्यों को करें ताकि उन्हें एवं देश को फायदा होगा

श्री तोमर ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बल देने की बात कही पशु धन का लाभ प्रद रूप कार्य हो  इस दिशा पर  कार्य करना  होगा  जलवायु परिवर्तन की चुनौती हम सबके लिए एक  गंभीर  मुद्दा है इस हेतु  केवीके क्षेत्रवार पूरी तैयारी करें,  मृदा स्वास्थ्य  हेतु  जागरूकता कार्यक्रम चलाएं  सरकार इस कार्य हेतु धनराशि प्रदान करेगी इसके लिए स्वच्छता दूत जैसे मृदा स्वास्थ्य दूत तैयार किए जाएं जो हमारे किसान भाइयों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर योजनाबद्ध तरीके से समझाएं ताकि आगे की स्थितियां खेती के क्षेत्र में अपने आप सुधरेंगे और हम समृद्धि की ओर बढ़ पाएंगे।

 श्री तोमर ने कहा कि कोरोना संकट ने हम सब को अवसर दिया है किसानों के लिए सरकार ने री फार्म किए अब किसानों को मंडी जाना जरूरी नहीं फसल बेचने के लिए टैक्स भी नहीं देना है प्रधानमंत्री जी ने उन्हें कानूनी अधिकार देकर आजादी दे दी है 2 नए अध्यादेश जारी हुए हैं जिनके माध्यम से क्लस्टर खेती को बढ़ावा मिल रहा है केवीके को इसकी तैयारी करना चाहिए हर केवीके को क्षेत्र के अनुसार प्लानिंग के साथ कार्य को दिशा प्रदान करनी होगी आईसीएआर को पूरी योजना बनाना चाहिए उन्होंने खेती किसानी में ग्रामीण क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकार द्वारा कानूनी बदलाव भारी-भरकम पैकेज रू. 1  लाख करोड़ के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड सहित अन्य पैकेज घोषित कर दिए गए हैं अब इन के माध्यम से निजी निवेश बढ़ने वाला है यह पूरा पैसा आत्मनिर्भर भारत बनाने में मदद करेगा 10,000 नए FPO  की भी गाइडलाइन बन गई है जिन्हें बुवाई से लेकर विपणन तक के लिए संपूर्ण आर्थिक सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी  इस कार्य में ज्यादा से ज्यादा छोटे किसानों को जोड़ा जाना चाहिए   समापन अवसर पर  झाबुआ आदिवासी क्षेत्र की कड़कनाथ मुर्गी के वैश्विक स्तर पर प्रचार प्रसार करने हेतु केवीके के प्रयासों की सराहना की एवं श्री तोमर ने कहा कि कड़कनाथ को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से तैयारी करके इसके उपयोगिता एवं विशिष्टता का जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रचार प्रसार करने की अति आवश्यकता है ताकि यह दुनिया में अपनी बादशाहत कर सकता है।

केवीके के 27 वी जोनल कार्यशाला के समापन अवसर पर आईसीएआर अटारी  जोन  9 के  निदेशक  डॉ अनुपम मिश्रा  द्वारा सभी सम्माननीय मुख्य अतिथि , विशिष्ट अतिथि एवं संचालक , समस्त कुलपति एवं कृषि विज्ञान केंद्रों की वैज्ञानिकों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया  , डॉ अनुपम मिश्रा  द्वारा तीन दिवसीय जोनल कार्यशाला की प्रमुख बिंदुओं पर अपनी बात रखी।

इस दौरान आईसीएआर के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्र , उप महानिदेशक कृषि प्रसार डॉ अशोक कुमार सिंह , डॉक्टर बीपी चहल  दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के पदाधिकारी श्री अभय महाजन, कृषि एवं कृषि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति , आईसीएआर  अटारी के समस्त  निदेशक एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों  का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए तीन दिवसीय जोनल कार्यशाला में  कुल 10 तकनीकी सत्र  का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से  किए जा रहे  कृषि  के विकास एवं उत्थान हेतु एवं कार्यों का  समीक्षा एवं  भविष्य की रणनीति पर  मंथन किया गया जो आगामी समय में  देश को आत्मनिर्भर भारत एवं ग्रामीण  अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं विकास की दिशा में  ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी कार्यक्रम का सफल संचालन अटारी के प्रमुख वैज्ञानिक  डॉ एस आर के सिंह द्वारा किया गया  एवं आभार प्रदर्शन डॉक्टर बीपी चहल द्वारा किया गया ,  समापन अवसर पर संचालक विस्तार सेवाएं डॉ श्रीमती ओम गुप्ता डॉ टीआर शर्मा एवं डॉ ए.ए. रावत की उपस्थिति  रहे।

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