अब आलू की कीमतें गिरने से अन्नदाताओं में असंतोष

Share this

इंदौर। इन दिनों उद्यानिकी फसलों की कीमतों में हो रही गिरावट से किसान परेशान हैं। प्याज के बाद अब आलू की कीमतें भी गिरने से अन्नदाताओं में असंतोष देखा जा रहा है। नए आलू की आवक अभी शुरू ही हुई है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज से पुराने आलू की आवक बढऩे से यह हालात बने हैं। उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान निराश हो रहे हैं।

इंदौर की चोइथराम मंडी में इन दिनों आलू की भरपूर आवक हो रही है। जिसमें कोल्ड स्टोरेज से निकाले गए आलू की बहुतायत है। हालांकि नए आलू की आवक भी शुरू हो गई है, लेकिन इंदौर क्षेत्र में अभी आलू कच्चा होने से 15 -20 दिन बाद नए आलू की आवक में और वृद्धि होगी। जामली के किसान श्री बलराम गणेश पाटीदार ने 3 एकड़ में, उमरिया के श्री मोहन सिंह लालसिंह सोलंकी ने 5 एकड़ में तथा  बड़ी कलमेर के किसान श्री कमल सिंह भगवान सिंह केलवा ने 5  बीघा में आलू की ज्योति और एलआर किस्म बोई, जिसे अभी बेचा नहीं है। जबकि जामली के किसान भरत दुर्गाशंकर पाटीदार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कृषक जगत को बताया कि पहले आलू के दाम अच्छे मिलते थे, लेकिन अब ज्योति आलू 7 -8  रु. किलो और चिप्स के  आलू का 12 -15 रु. प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जबकि इसका बीज ही 1200 -1300  रुपए का 50 किलो मिलता है। मजदूरी महंगी हो गई है। कीटनाशकों के दाम डेवढे हो गए हैं। उपज कम हो रही है और भाव भी नहीं मिल रहे हैं। 

किसानों पर तो दोहरी मार पड़ रही है। लागत ही नहीं निकल रही है। ऐसे ही हालात रहे तो किसान आलू बोना बंद कर देंगे।

किसानों ने बताया कि आलू की कीमतें गिरने का प्रमुख कारण भंडार किए गए आलू का बड़ी मात्रा में बाजार में आना है, क्योंकि व्यापारियों ने सीजन के आखिर में दाम बढऩे की आस में आलू स्टोरेज से नहीं निकाला। भंडारण के समय दाम 8 -12  रुपए प्रति किलो था। जो फुटकर में 18 -20  रुपए किलो बिक रहा था। लेकिन अभी देश की थोक मंडियों में भी आलू  के दाम बहुत गिर गए हैं। सीजन में नए आलू आना सामान्य बात है, लेकिन स्टोर करते समय आलू की जो कीमत थी और आज जो कीमत है, उससे आलू व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। अचानक उत्पन्न होने वाली बाजार की ऐसी विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए सरकार को भी कोई वैकल्पिक नीति तैयार रखनी चाहिए जिसका इस्तेमाल कर किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।