राज्य कृषि समाचार (State News)

अमरूद में बहार नियंत्रण: एक समीक्षात्मक लेख

लेखक: राम अवतार चौधरी, फल विज्ञान (राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर), आस्था, विज्ञान (राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर)

29 नवंबर 2025, भोपाल: अमरूद में बहार नियंत्रण: एक समीक्षात्मक लेख –

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सारांश

अमरूद (Psidium guajava) एक महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय फल है, जिसे न केवल उसके स्वाद और पोषण के लिए पसंद किया जाता है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसल भी है। अमरूद के उत्पादन में वृद्धि और उसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए बहार नियंत्रण एक महत्वपूर्ण तकनीक है। अमरूद में प्राकृतिक रूप से होने वाली बहार (flowering and fruiting cycle) अक्सर मौसम और जलवायु के बदलावों से प्रभावित होती है, जो उत्पादकता में कमी का कारण बनती है। यह समीक्षात्मक लेख अमरूद में बहार नियंत्रण के विभिन्न तरीकों, उनके प्रभाव, और उपज में वृद्धि पर चर्चा करेगा। इस लेख में बहार की परिभाषा, नियंत्रण विधियाँ, और इससे होने वाले लाभों को विस्तार से समझाया जाएगा।

परिचय

अमरूद एक उष्णकटिबंधीय फल है, जो कृषि क्षेत्र में अपनी बहुमुखी उपज और पोषक तत्वों के कारण महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, अमरूद की उपज में असमानता और मौसमीय उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन में कमी आ सकती है। अमरूद में “बहार” एक प्राकृतिक घटना है, जब पेड़ मौसम के हिसाब से फलन के लिए विश्राम करता है। इसका प्रभाव अमरूद के उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है। इस लेख में अमरूद में बहार नियंत्रण के विभिन्न तरीकों की समीक्षा की जाएगी, ताकि अधिक और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त की जा सके।

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बहार क्या है?

“बहार” का अर्थ है, अमरूद के पौधों में फलन और फूलने की प्रक्रिया का एक स्थिर या नियंत्रित चरण। अमरूद में यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से समय के अनुसार होती है, और इसे विभिन्न मौसमीय कारक प्रभावित करते हैं। सामान्यत: अमरूद में बहार की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पौधों में पानी की कमी या तापमान में बदलाव होता है। इस दौरान अमरूद के पेड़ सूख जाते हैं और फलन की प्रक्रिया धीमी या रुक जाती है।

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बाहर के समय में, अमरूद के पेड़ फल नहीं देते, या उनका फलन सामान्य से कम होता है। इसका प्रभाव पूरी फसल पर पड़ता है, जिससे कृषि उत्पादकता में गिरावट आती है। इसलिए, बहार को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमरूद की उपज स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाली हो।

बहार नियंत्रण विधियाँ       

अमरूद में बहार नियंत्रण के कई तरीके हैं, जिनके माध्यम से फसल की उपज को बढ़ाया जा सकता है। इनमें से कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:

1. जलवायु और सिंचाई प्रबंधन

अमरूद के पेड़ों में बहार को नियंत्रित करने के लिए सबसे सरल और प्रभावी तरीका सिंचाई और जलवायु प्रबंधन है। अमरूद को नियंत्रित तरीके से पानी देने से पेड़ की सक्रियता बनाए रखी जा सकती है। सूखा या अत्यधिक पानी की कमी से अमरूद में बहार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नियमित सिंचाई और पानी की उपलब्धता से अमरूद के पौधों में फूल और फल जल्दी आते हैं।

2. हार्मोनल नियंत्रण (Growth Regulators)

अमरूद में बहार को नियंत्रित करने के लिए कुछ हार्मोनल उपायों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गिब्बेरेलिक एसिड (GA3) और साइटोकाइनिन जैसे हार्मोन का उपयोग करने से अमरूद के पेड़ में फूलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। ये हार्मोन पौधों की वृद्धि को उत्तेजित करते हैं और फलन के समय को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

 3. रासायनिक स्प्रे और निषेचन

अमरूद में बहार नियंत्रण के लिए कुछ रासायनिक स्प्रे भी उपयोग किए जाते हैं। विशेष रूप से, जिंक सल्फेट, नाइट्रोजन और फास्फेट जैसे रासायनिक तत्वों का छिड़काव करने से अमरूद के पौधों में बहार नियंत्रण में मदद मिलती है। इसके अलावा, उचित मात्रा में उर्वरक का उपयोग भी पौधों के स्वास्थ्य को बनाए रखता है और उन्हें उपयुक्त समय पर फलने के लिए उत्तेजित करता है।

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 4. विकसित अमरूद किस्में    

कुछ अमरूद अमरूद किस्में स्वाभाविक रूप से बेहतर फलन और बहार नियंत्रण की क्षमता रखती हैं। जैसे कि पिंक अमरूद और बैंगनी अमरूद जैसी किस्में जल्दी बहार देती हैं और इनका उत्पादन अधिक होता है। किसानों द्वारा इन किस्मों का चयन करके बहार नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

5. मौसम और जलवायु नियंत्रण

अमरूद के पेड़ों के लिए उपयुक्त मौसम और जलवायु का होना भी बहार को नियंत्रित करने में सहायक होता है। जब तापमान और नमी स्तर को सही तरीके से प्रबंधित किया जाता है, तो अमरूद का उत्पादन बढ़ता है और बहार की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

बहार नियंत्रण के लाभ

1. उच्च उपज: बहार नियंत्रण से अमरूद के पौधों में फलने की प्रक्रिया स्थिर होती है, जिससे अधिक और उच्च गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती है। यह किसान के लिए आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद होता है।

2. पौधों की स्वस्थ वृद्धि: जब बहार नियंत्रित किया जाता है, तो पौधों की वृद्धि और विकास स्वस्थ रहते हैं। इसका प्रभाव उत्पादन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।

3. समय पर फसल प्राप्ति: बहार नियंत्रण से अमरूद का उत्पादन समय पर होता है, जिससे किसान फसल को बाजार में सही समय पर बेच सकते हैं और बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

4. वाणिज्यिक लाभ: बाजार में अमरूद की मांग अधिक रहती है, और उच्च गुणवत्ता की उपज से व्यापारी भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

निष्कर्ष

अमरूद में बहार नियंत्रण तकनीकें किसानों के लिए अत्यधिक फायदेमंद साबित हो सकती हैं। ये विधियाँ न केवल उत्पादकता को बढ़ाती हैं, बल्कि अमरूद की गुणवत्ता को भी सुधारती हैं। जलवायु प्रबंधन, हार्मोनल नियंत्रण, रासायनिक स्प्रे और उचित किस्मों का चयन जैसे उपायों से अमरूद की बहार को नियंत्रित किया जा सकता है और इसके माध्यम से अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार, अमरूद के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बहार नियंत्रण एक प्रभावी और लाभकारी तरीका है।

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