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राज्य कृषि समाचार (State News)

हिमाचल के सोलन में ब्लूबेरी की व्यावसायिक खेती सफल, किसानों को मिल रहे 1000 रुपये प्रति किलो तक दाम

14 सितंबर 2026, सोलन (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल के सोलन में ब्लूबेरी की व्यावसायिक खेती सफल, किसानों को मिल रहे 1000 रुपये प्रति किलो तक दाम –  अभी तक भारत में सीमित मात्रा में उगाई जाने वाली विदेशी फल ब्लूबेरी की व्यावसायिक खेती अब हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में सफलता की नई कहानी लिख रही है। जिले के धारों की धार क्षेत्र में प्रगतिशील किसानों ने ब्लूबेरी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है और स्थानीय बाजार में उन्हें प्रति किलोग्राम 1,000 रुपये तक का दाम मिल रहा है।

बागवानी विभाग के अनुसार सोलन, कुनिहार और कंडाघाट ब्लॉक में चार प्रदर्शन केंद्रों पर लगभग 1,400 ब्लूबेरी के पौधे लगाए गए थे। इनमें से जो पौधे करीब 6.12 फीट ऊंचाई तक बढ़ चुके हैं, उन दो साल पुराने पौधों ने इस साल शानदार पैदावार दी है, जिससे किसानों को इस नई फसल की व्यावहारिकता का भरोसा मिला है।

सरकारी योजना से मिला सहारा

यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र प्रायोजित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (आईएचडीएम) के तहत चलाया जा रहा है। बागवानी विभाग की उप निदेशक डॉ. शिवाली ठाकुर ने कहा, “भारत में अभी ब्लू बेरी की व्यावसायिक खेती बहुत सीमित है।” उनके मुताबिक यही वजह है कि सोलन में मिली यह सफलता आने वाले समय में हिमाचल के अन्य पहाड़ी इलाकों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

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विभाग ने बताया कि सोलन जिले में एचपी सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट के तहत आगे चलकर 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ब्लूबेरी की खेती का विस्तार करने की योजना है। इससे साफ है कि यह अभी एक ट्रायल परियोजना से आगे बढ़कर एक स्थायी व्यावसायिक मॉडल में बदलने की तैयारी में है। विभाग का कहना है कि आने वाले वर्षों में इच्छुक किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री और तकनीकी मार्गदर्शन दोनों मुहैया कराए जाएंगे, ताकि विस्तार योजना समय पर पूरी हो सके।

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सेब के इलाके में क्यों खास है यह प्रयोग

सोलन और आसपास का इलाका परंपरागत रूप से सेब और अन्य समशीतोष्ण फलों की खेती के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में ब्लूबेरी जैसी नई और ऊंचे दाम वाली फसल का सफल ट्रायल किसानों के लिए आय के नए विकल्प खोलता है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास सीमित जमीन है लेकिन जो प्रति एकड़ ज्यादा मुनाफा चाहते हैं।

ब्लूबेरी की खेती में शुरुआती निवेश और देखभाल पारंपरिक फलों की तुलना में अलग तरह की होती है, लेकिन शुरुआती नतीजों को देखते हुए बागवानी विभाग किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देने पर भी जोर दे रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में शहरी उपभोक्ताओं के बीच सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ब्लूबेरी जैसे “सुपरफूड” फलों की मांग तेजी से बढ़ी है। अभी तक भारत में बिकने वाली ज्यादातर ब्लूबेरी विदेशों से आयात होकर आती है, जिसके चलते बाजार में इसके दाम काफी ऊंचे रहते हैं। ऐसे में सोलन जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों में इसकी घरेलू पैदावार शुरू होने से आयातित फल पर निर्भरता घटने के साथ-साथ किसानों को भी ऊंचे दाम का सीधा फायदा मिल सकता है।

बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लूबेरी की अच्छी पैदावार के लिए ठंडी जलवायु और पर्याप्त चिलिंग आवर्स जरूरी होते हैं, जो हिमाचल के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं। यही वजह है कि जो इलाके पहले से सेब, नाशपाती और आड़ू जैसे शीतोष्ण फलों की खेती के लिए जाने जाते हैं, वहां ब्लूबेरी को भी आसानी से अपनाया जा सकता है।

ब्लूबेरी जैसे उच्च मूल्य वाले फल की सफल व्यावसायिक खेती पहाड़ी राज्यों में फसल विविधीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। नर्सरी कारोबारियों, बागवानी उपकरण एवं पैकेजिंग से जुड़े व्यवसायों के लिए भी यह एक नया अवसर है, क्योंकि सफल ट्रायल के बाद मांग बढ़ने पर पौध सामग्री और तकनीकी सहयोग की जरूरत भी बढ़ेगी। इच्छुक किसान अपने जिले के बागवानी विभाग कार्यालय से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी ले सकते हैं।

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