इस वर्ष 3 करोड़ टन से अधिक होगा चीनी उत्पादन

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किसानों का बकाया रिकॉर्ड स्तर पर, मिलों पर भारी दबाव

मुंबई। चालू सीजन में भारत का चीनी उत्पादन तीन करोड़ टन पार जाने वाला है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार, 15 अप्रैल तक यह पहले ही 2.9 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान पार कर चुका है और मिलों ने 2.998 करोड़ टन उत्पादन किया है। अभी भी 227 चीनी मिलें गन्ने की पेराई कर रही हैं। इसका मतलब यह है कि उत्पादन 17-18 (अक्टूबर-सितंबर) के चीनी सीजन में काफी ज्यादा रहेगा।

इस्मा ने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति में वृद्धि की वजह से कीमतें भारी दबाव में हैं तथा उत्पादन लागत की तुलना में चीनी की मौजूदा कीमतें (एक्स-मिल) तकरीबन आठ रुपये प्रति किलोग्राम कम हैं और चीनी मिलों को भारी नुकसान हो रहा है। नतीजतन, 15 अप्रैल तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 180 अरब रुपये से अधिक हो चुकी है और पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में और गिरावट आई है। इस तरह, गन्ने का बकाया 200 अरब रुपये से अधिक हो जाएगा जो पिछले किसी भी सीजन में अब तक का सबसे अधिक बकाया होगा।

सरकार ने पहले चीनी मिलों की स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित की थी और अब कोटे के तहत 20 लाख टन निर्यात की अनुमति दी है लेकिन इसके बावजूद गिरती कीमतों को नहीं रोका जा सका, जिससे चीनी मिलों के साथ-साथ गन्ना किसानों पर दबाव बढऩे लगा। इस्मा ने आकलन किया है कि रंगराजन समिति के फॉर्मूूले के अनुसार (जिसे पांच साल पहले प्रस्तावित किया गया था और उद्योग अभी भी इसे लागू करने के लिए जोर दे रहा है क्योंकि यह चीनी की कीमतों को किसानों को दिए जाने वाले गन्ने की कीमतों के साथ जोडऩे की पेशकश करता है) चीनी के मौजूदा एक्स-मिल दामों पर गन्ने के लिए चीनी मिलों की भुगतान क्षमता प्रति क्विंटल तकरीबन 230 रुपये बैठती है। देहात के लिए इसकी वसूली दर 10.8 प्रतिशत है, जबकि 10.8 प्रतिशत की दर पर चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया जाने वाला उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) प्रति क्विंटल 290 रुपये है।

इस्मा ने कहा कि मिलें यह दाम चुकाने में असमर्थ हैं। इसलिए 2015-16 के चीनी सीजन की ही तरह, जब सरकार ने चीनी मिलों और गन्ना किसानों की एफआरपी के रूप में प्रति टन गन्ना 4.50 रुपये मदद की थी, चालू वर्ष में भी एक बार फिर सरकार को तत्काल एफआरपी का भुगतान करने की आवश्यकता है, जबकि इस बार संकट भी अधिक है। महाराष्ट्र में पेराई शुरू कर चुकीं 187 चीनी मिलों में से अब केवल 50 ही गन्ने की पेराई कर रही हैं। लेकिन 15 अप्रैल तक उत्पादन 1.049 करोड़ टन तक पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिल पहले ही अब तक का सर्वाधिक 1.05 करोड़ टन उत्पादन कर चुकी हैं।

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