जैविक विधि से – लहलहाए नन्नेलाल के गेहूं

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(रामस्वरूप लौवंशी)

हरदा। जिले के ग्राम बालागांव के कृषक श्री नन्नेलाल भाटी जिले एवं ग्राम में जैविक कृषक के नाम से प्रसिद्ध हैं। श्री भाटी लगभग सात वर्ष से पूर्णत: जैविक खेती कर रहे हैं। पिछले सात वर्षों से श्री भाटी ने रसायनिक खाद एवं दवाइयों का उपयोग पूर्णत: बन्द कर दिया है। आप सात साल पहले जैविक खेती विशेषज्ञ श्री सुभाष पालेकर के संपर्क में आये तब से आपका रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ता गया। इसके लिये आपने अपने घर पर ही वर्मी कम्पोस्ट बना रखा है, जिसमें आप जैविक खाद बनाते हैं। जीवामृत और डी कम्पोजर भी आप बनाते हैं।

जैविक खाद से केंचुआ खाद का निर्माण

अब आपके पास केंचुए इतने अधिक मात्रा में हंै कि आप इनका विक्रय भी करते हैं। आपके पास पांच गाय हैं, जिनके गोबर एवं सड़े गले कचरे से आप केंचुआ खाद बनाते हैं। अभी आपने अपने खेत पर तेजस एचआई 8759 गेहूं की किस्म लगाई है जो पूर्णत: जैविक है। 45 किलो प्रति एकड़ के मान से बोनी की है। गेहूं की बोनी 3 नवम्बर को की थी जिसमें 3 सिंचाई की है। श्री भाटी को 2014-15 में राज्यस्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार और 2017 में राष्ट्रीय कृषि उदय पुरस्कार एवं 2017 में ही कृषि भूषण पुरस्कार भी मिला है।

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