राज्य कृषि समाचार (State News)

इक्रीसेट के बुंदेलखंड प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यूपी सरकार का बड़ा कदम, होगा राज्यव्यापी विस्तार

15 अक्टूबर 2024, झांसी: इक्रीसेट के बुंदेलखंड प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यूपी सरकार का बड़ा कदम, होगा राज्यव्यापी विस्तार – उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च अधिकारियों ने हाल ही में बुंदेलखंड के चार गांवों का दौरा किया, जहां वैज्ञानिक प्रयासों और पारंपरिक ज्ञान के सहयोग से बंजर जमीन को उपजाऊ खेतों में बदलने का काम किया गया है। इस पायलट परियोजना की सफलता से हजारों किसानों की जिंदगी में बदलाव आया है, जिससे राज्य सरकार अब इस परियोजना का विस्तार करने की योजना बना रही है।

इस परियोजना के तहत पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड में पुरानी जल संरचनाओं का पुनर्जीवन किया गया, जिससे अब यहां की जमीन तीन फसलों की पैदावार दे रही है। अंतर्राष्ट्रीय सूखा-रोधी फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट/ ICRISAT) के साथ साझेदारी में चल रहे इस प्रयास ने न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। इक्रीसेट  की महानिदेशक डॉ. जैकलीन ह्यूजेस ने इस परियोजना को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और पारंपरिक ज्ञान के बेहतर उपयोग का उदाहरण बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू, कृषि उत्पादन आयुक्त मोनिका गर्ग, और झांसी के मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बदोखर, नोटो, सुत्ता और पुरा बिर्धा गांवों का दौरा किया। इन गांवों में इक्रीसेट  के मार्गदर्शन में जल संरक्षण और कृषि विकास के कई सफल मॉडल देखे गए।

डॉ. राजू ने किसानों से जल संरक्षण के साथ-साथ वैकल्पिक आजीविका के रूप में मछली पालन और डेयरी व्यवसाय को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने इक्रीसेट  के वैज्ञानिकों से परियोजना क्षेत्र में सभी खुले कुओं का नक्शा बनाने की भी सिफारिश की, ताकि पानी प्रबंधन में सुधार किया जा सके और अधिक सटीक डेटा संग्रहण हो सके।

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तहरौली परियोजना: बुंदेलखंड में जल पुनर्जीवन की मिसाल

इस दौरे का केंद्र बिंदु झांसी जिले के तहरौली गांव में हावेली (पारंपरिक जल संचयन संरचना) का पुनरुद्धार था। इक्रीसेट  विकास केंद्र के क्लस्टर प्रमुख डॉ. रमेश सिंह और उनकी टीम ने बताया कि ये हावेली मानसून के दौरान जलाशयों की तरह काम करती हैं और बारिश के बाद की रबी फसलों के लिए उपजाऊ जमीन प्रदान करती हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि इन संरचनाओं के निर्माण में प्रशिक्षित राजमिस्त्री लगे हुए हैं, जो अत्यधिक बारिश के बावजूद पांच दशकों तक टिकने वाले जल संचयन ढांचे बना रहे हैं।

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सुत्ता गांव: प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से बदलाव

सुत्ता गांव में, टीम ने जल संरक्षण, हावेली पुनरुद्धार और कृषि वानिकी जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन गतिविधियों को देखा, जो किसानों की आय दोगुनी करने की पहल का हिस्सा हैं। इस परियोजना के तहत लगाए गए चेक डैम और हावेली प्रणाली ने सूखे पड़े कुओं को 15 साल बाद फिर से भर दिया है, जिससे किसानों की खेती और आजीविका में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार और इक्रीसेट  की यह साझेदारी बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि विकास और जल संरक्षण के जरिए किसानों की आजीविका में स्थायी सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि उत्पादन आयुक्त मोनिका गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परियोजना का विस्तार करने पर जोर दिया, जिससे अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

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