नरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में 7 एफआईआर दर्ज
11 अप्रैल 2026, छिंदवाड़ा: नरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में 7 एफआईआर दर्ज – जिले में गेहूं कटाई का कार्य तेजी से जारी है। कटाई के बाद खेतों में बचने वाले डंठल (नरवाई) के उचित प्रबंधन को लेकर कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा मैदानी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को समझाया जा रहा है कि नरवाई जलाने से खेतों के मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है, जिससे आगामी फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शासन स्तर पर भी नरवाई न जलाने के लिए किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक पंचायत में गठित टीमों द्वारा चौपाल और संगोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को नरवाई में आग न लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है तथा शपथ दिलाई जा रही है। साथ ही मुनादी के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जा रही है और नरवाई जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी दी जा रही है। किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर/हैप्पी सीडर के माध्यम से खड़ी नरवाई में बुवाई, तथा डी कंपोजर के उपयोग जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। जिले में कृषि एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और सूचना मिलने पर मौके पर जांच कर कार्रवाई की जा रही है।
राजस्व विभाग के पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव/रोजगार सहायक की टीम द्वारा नरवाई जलाने की घटनाओं का पंचनामा तैयार कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है। अब तक जिले में कुल 111 घटनाएं सेटेलाइट के माध्यम से प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 78 घटनाएं जंगल में महुआ बीनने के कारण आग लगाने की पाई गई हैं। अब तक नरवाई जलाने के मामलों में विकासखंड अमरवाड़ा में 5, चौरई में 1 और बिछुआ में 1 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा बिछुआ और छिंदवाड़ा विकासखंड में एक-एक किसान पर जुर्माना लगाया गया है। शेष 24 घटनाओं के प्रतिवेदन प्राप्त होना बाकी है।
कलेक्टर श्री नारायन एवं उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं और खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर और रोटावेटर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग करें। साथ ही फसल अवशेषों से खाद बनाने जैसे उपाय अपनाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। हार्वेस्टर से कटाई के बाद सुपर सीडर के माध्यम से जायद फसलों की बुवाई करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि नरवाई जलाने की घटनाओं को रोका जा सके।
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