प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडियों को हाइटैक बनाया जाएगा

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25 दिसम्बर 2020, भोपाल। प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडियों को हाइटैक बनाया जाएगा प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडियों को आधुनिक हाइटैक बनाया जा रहा है। इनमें गोदाम, भंडारण, मूल्य संवर्धन, शीत भंडारण और एग्री क्लीनिक आदि सुविधाएं होंगी। ग्रेडिंग मशीनें भी लगाई जाएंगी।

मिशन मोड पर करें एफ.पी.ओ. का कार्य

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम दिलाने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक एफ.पी.ओ. (किसान उत्पादक समूह) बनाए जाएं तथा वर्तमान एफ.पी.ओ. को अधिक सक्रिय किया जाए। इससे किसान अपनी फसल सीधे बाजार में बेच पाएगा तथा बिचौलिए कम होंगे। वर्तमान में प्रदेश में 394 एफ.पी.ओ. सक्रिय है। एफ.पी.ओ. में न्यूनतम 03 व्यक्ति हो सकते हैं।

हर वर्ष 30 प्रतिशत बीज का रिप्लेसमेंट होना चाहिए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अच्छी फसलों के लिए प्रतिवर्ष 30 प्रतिशत बीज का प्रतिस्थापन होना चाहिए। किसानों को उन्नत बीज मिलना चाहिए। प्रदेश में बीज उत्पादक सहकारी समितियों को और सक्रिय किया जाए।

2 जिलों में नए कृषि विज्ञान केन्द्र

वर्तमान में प्रदेश के 50 जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित हैं। शेष 02 जिलों विदिशा एवं निवाड़ी में नए कृषि विज्ञान केन्द्र खोले जाएंगे।

प्रदेश की प्रमुख फसलों की जी.आई. टैगिंग

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की प्रमुख फसलों शरबती गेहूँ, लाल ग्राम पिपरिया तूअर, काली मूंछ चावल, जीरा शंकर चावल तथा चिन्नौर धान की जी.आई. टैगिंग कराई जाए। बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग कराई जा रही है।

केन्द्र सरकार की कृषि अधोसंरचना फण्ड योजना में मध्यप्रदेश अव्वल

कृषि अधोसंरचना विकास के लिए ऋण प्रदाय किए जाने की केन्द्र सरकार की कृषि अधोसंरचना फण्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम स्थान पर है। मध्यप्रदेश से 231 करोड़ रूपए के कुल 222 प्रकरण सत्यापित किए गए हैं। इनमें से 23 प्रकरणों में 21 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है तथा 98 करोड़ के 87 प्रकरण बैंकों के पास ऋण वितरण के लिए लंबित हैं। शेष में कार्यवाही जारी है। इसके अंतर्गत सर्वाधिक प्रकरण वेयर हाउस के लिए 152 करोड़ के तथा इसके बाद कोल्ड स्टोरेज के लिए 26 करोड़ के, सौटिंग एवं ग्रेडिंग के लिए 2.2 करोड़ के तथा लॉजिस्टिक के लिए 2.02 करोड़ रूपए के प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं। प्रदेश के कुल 29 जिलों से प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं जिनमें सर्वाधिक प्रकरण रायसेन से 38, भोपाल से 26, सीहोर से 15 तथा इंदौर से 14 प्रस्तुत हुए हैं।

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