राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कर्नाटक के जीआई-टैग वाले देसी नींबू की पहली खेप ओमान पहुंची, वैश्विक बाजारों में भारत की पहुंच मजबूत

20 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: कर्नाटक के जीआई-टैग वाले देसी नींबू की पहली खेप ओमान पहुंची, वैश्विक बाजारों में भारत की पहुंच मजबूत – भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा देते हुए, कर्नाटक के विजयपुरा जिले से जीआई-टैग प्राप्त ‘इंडी लाइम’ की पहली खेप 19 दिसंबर 2025 को ओमान को निर्यात की गई। इस निर्यात के साथ ही भारतीय देसी नींबू ने वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान और मजबूत की। विजयपुरा जिले से अब तक लगभग 12.35 मीट्रिक टन इंडी लाइम का निर्यात किया जा चुका है।

ओमान और अन्य वैश्विक बाजारों में उत्साहजनक प्रतिक्रिया

ओमान को भेजी गई यह खेप 3 मीट्रिक टन की थी। इससे पहले, 24 अगस्त 2025 को जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम की पहली खेप दुबई भेजी गई थी, जिस पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। दुबई में इस उत्पाद का निर्यात शुरुआती 3 मीट्रिक टन से बढ़कर कुल 12 मीट्रिक टन तक पहुँच गया। इसके साथ ही 350 किलो की मात्रा यूनाइटेड किंगडम भेजने के लिए भी रवाना की गई, जिससे भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपज का नया अवसर मिला।

भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते से निर्यात को मिलेगा और बल

हाल ही में भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) / मुक्त व्यापार समझौते (FTA) हुआ है, जिसके तहत यह निर्यात और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाना है।

GI-टैग से किसानों को फायदा

GI-टैग प्राप्त इंडी लाइम की सफलता ने विजयपुरा के किसानों को प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिलाई है। इससे किसानों की आय में सुधार हुआ है और घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भरता कम हुई है। इंडी लाइम की विशेष सुगंध, रस की मात्रा और लंबा शेल्फ लाइफ इसे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।

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APEDA का सहयोग से बड़ा निर्यात 

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों के प्रचार, ब्रांडिंग और निर्यात में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना और फाइटोसैनिटरी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। इस निर्यात के साथ, भारत के कृषि-निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है और किसानों के लिए नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।

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