खरीफ-2022 में सोयाबीन बीज की किल्लत ?

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  • (विशेष प्रतिनिधि)

10 मई 2022, नई दिल्ली/भोपाल। । खरीफ-2022 में सोयाबीन बीज की किल्लत – खरीफ की तैयारी में जुटे देश एवं प्रदेश के किसानों को पीला सोना के नाम से विख्यात नकदी फसल सोयाबीन बीज की किल्लत हो सकती है। इसका मुख्य कारण पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन, उत्पादकता में कमी, किसानों का मोह भंग होना तथा अन्य फसलों को लेने के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना साथ ही बीज एवं अन्य कृषि आदानों की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं। देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में लगभग 45 फीसदी योगदान देने वाले एवं सोया राज्य कहलाने वाले म.प्र. में ही गत वर्ष सोयाबीन बीज का संकट विकट था क्योंकि कोरोना काल के दो वर्षों में भारी बारिश और कीटव्याधि के कारण उत्पादन एवं उत्पादकता निम्न स्तर पर आ गई थी, गत वर्ष 2021 में सोयाबीन उत्पादन में कुछ वृद्धि का अनुमान है इसके बावजूद खरीफ में लगभग 2 लाख क्ंिवटल से अधिक बीज की कमी होने की संभावना है जो चिंता का विषय है।

देश में बीज की उपलब्धता

देश में इस वर्ष खरीफ में 37 लाख 21 हजार क्विंटल सोयाबीन बीज की मांग है। इस मांग के विरुद्ध केवल 35 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है। लगभग 2 लाख क्विंटल से अधिक की कमी बनी हुई है। इसका उल्लेख राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ. ए.के. सिंह ने भी किया।

देश में उत्पादन

देश में मुख्यत: म.प्र., महाराष्ट्र, राजस्थान, छ.ग., गुजरात, कर्नाटक एवं तेलंगाना में सोयाबीन फसल ली जाती है। औसत उत्पादन लगभग 120 लाख टन होता है। इसमें म.प्र. सबसे आगे है उत्पादन में लगभग 45 फीसदी का योगदान देता है। इसके बाद महाराष्ट्र का नम्बर आता है जिसका योगदान 40 फीसदी के आस-पास है। देश में गत वर्ष 2021 में 147.65 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई थी तथा उत्पादन (द्वितीय अनुमान के मुताबिक) 131.16 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं इसके पूर्व वर्ष 2020 में 126.10 लाख टन, वर्ष 2019 में 112.26 लाख टन उत्पादन हुआ था।

म.प्र. में घटती उत्पादकता

इसी प्रकार म.प्र. में उत्पादकता 623 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर ठिठकी हुई है और इस घटती उत्पादकता से सोयाबीन बीज की कमी बनी हुई है जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

देश की शिक्षण संस्थाओं के शोधों से प्रदेश, संभाग एवं जिलों को फायदा न हो तो कोई मतलब नहीं है। मध्यप्रदेश में 1 एकड़ में 6 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन होता है जबकि ब्राजील में 26, अर्जेंटीना में 28 और अमेरिका में 30 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। हमारे शिक्षण संस्थानों को सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने को लेकर शोध करना चाहिए।

  • नितिन गडकरी, केन्द्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग
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