स्काइमेट का पूर्वानुमान: 2026 में भारत में सामान्य से कम रहेगा मानसून, 94% एलपीए का अनुमान
08 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: स्काइमेट का पूर्वानुमान: 2026 में भारत में सामान्य से कम रहेगा मानसून, 94% एलपीए का अनुमान – स्काइमेट वेदर (Skymet Weather) ने वर्ष 2026 के लिए मानसून पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें दक्षिण-पश्चिम मानसून को सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है। जून से सितंबर की चार माह की अवधि के लिए कुल वर्षा 868.6 मिमी के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 94% (±5%) रहने की संभावना है। यह अनुमान 90–95% एलपीए की श्रेणी में आता है। जनवरी 2026 में जारी अपने पूर्व संकेत में भी स्काइमेट ने मानसून को कमजोर रहने का आकलन किया था, जिसे अब बरकरार रखा गया है।
जतिन सिंह, प्रबंध निदेशक, स्काइमेट वेदर के अनुसार, “डेढ़ वर्ष तक ला नीना की स्थिति रहने के बाद अब प्रशांत महासागर की परिस्थितियां ईएनएसओ-न्यूट्रल के लिए अनुकूल हो गई हैं। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में महासागर-वायुमंडलीय युग्मन पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रारंभिक चरण में एल नीनो के बनने की संभावना है, जो वर्ष के अंत तक मजबूत होता जाएगा। एल नीनो की वापसी मानसून को कमजोर कर सकती है। मौसम के दूसरे हिस्से में अधिक अनियमितता और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।”
ईएनएसओ के अलावा इंडियन ओसियन डाइपोल (Indian Ocean Dipole) भी मानसून परिसंचरण को प्रभावित करता है। यदि मौसम के दौरान सकारात्मक आईओडी की मजबूत स्थिति बनती है, तो यह एल नीनो (El Niño) के प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकती है। हालांकि, आईओडी के तटस्थ या हल्के सकारात्मक रहने की संभावना है, जिससे मानसून की शुरुआत बेहतर रह सकती है, लेकिन दूसरे चरण में इसके प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। मौसमी वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है।
भौगोलिक दृष्टि से, मध्य और पश्चिम भारत के वर्षा आधारित क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में विशेषकर अगस्त और सितंबर के दौरान वर्षा में कमी देखी जा सकती है। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।
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