राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

फसल बीमा योजना (PMFBY) की परिचालन दिशानिर्देश: फसल बीमा आवेदन क्यों होते हैं खारिज और किसान कैसे कर सकते हैं अपील

19 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: फसल बीमा योजना (PMFBY) की परिचालन दिशानिर्देश: फसल बीमा आवेदन क्यों होते हैं खारिज और किसान कैसे कर सकते हैं अपील – केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत लागू परिचालन दिशानिर्देशों को स्पष्ट करते हुए बताया है कि फसल बीमा से जुड़े सभी आवेदन नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (NCIP) पर अनिवार्य गुणवत्ता जांच और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरते हैं। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

पीएमएफबीवाई के तहत प्रत्येक किसान के आवेदन की जांच कुछ मूल शर्तों के आधार पर की जाती है। इनमें किसान का फसल में बीमायोग्य हित होना, भूमि का स्वामित्व या किरायेदार/बटाईदार होने का प्रमाण, बीमित भूमि क्षेत्र का वास्तविक भूमि क्षेत्र के बराबर या उससे कम होना, बीमित फसल का वास्तव में बोई गई फसल से मेल खाना तथा किसान का नाम आधार रिकॉर्ड के अनुरूप होना शामिल है। यदि आवेदन में गलत जानकारी, अधूरे विवरण या आवश्यक दस्तावेजों की कमी पाई जाती है, तो बीमा कंपनियां ऐसे आवेदन को खारिज कर सकती हैं।

परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, बीमा कंपनियों को प्रीमियम कटौती या किसान पंजीकरण की अंतिम तिथि से 60 दिनों के भीतर आवेदन की जांच और निर्णय लेना होता है। सामान्यतः यह अंतिम तिथि खरीफ सीजन के लिए 31 जुलाई और रबी सीजन के लिए 31 दिसंबर होती है। जिन आवेदनों में दस्तावेज अधूरे होते हैं, उन्हें सीधे खारिज नहीं किया जाता, बल्कि सीएससी, बैंक या बीमा मध्यस्थ जैसे पंजीकरण माध्यमों को वापस भेज दिया जाता है ताकि आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जा सकें। यदि किसान समय पर दस्तावेज जमा कर देता है तो आवेदन स्वीकृत किया जा सकता है, अन्यथा उसे खारिज कर दिया जाता है।

यदि किसी किसान को अपने आवेदन के खारिज होने पर आपत्ति है, तो वह कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा किसान तालुका, तहसील या जिला स्तर के कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकता है या जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति (DGRC) के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकता है।

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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीएमएफबीवाई के तहत यदि दावों के निपटान में निर्धारित समय-सीमा से अधिक देरी होती है तो विलंबित भुगतान का प्रावधान है, लेकिन आवेदन खारिज करने पर बीमा कंपनियों पर दंड लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। आवेदन को खारिज करने से पहले संबंधित जिला और राज्य सरकार द्वारा उसकी समीक्षा और अनुमोदन आवश्यक होता है, और केवल वही आवेदन खारिज किए जा सकते हैं जिन्हें राज्य सरकार ने नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल के माध्यम से स्वीकृति दी हो।

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योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए जिला स्तरीय निगरानी समिति, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करते हैं, तथा राज्य स्तरीय निगरानी समिति, जिसकी अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रमुख सचिव करते हैं, का गठन किया गया है। किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रथम स्तर पर कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन (KRPH) उपलब्ध है, जिसे टोल-फ्री नंबर 14447 के माध्यम से साल के सभी दिनों में 24×7 संपर्क किया जा सकता है। इस सेवा के लिए देशभर में 10 स्थानों पर तैनात 500 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी कार्यरत हैं।

इसके अतिरिक्त, किसानों के लिए जिला शिकायत निवारण समिति (DGRC) और राज्य शिकायत निवारण समिति (SGRC) के माध्यम से अपीलीय स्तर पर भी शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध है।

लोकसभा में सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है, लेकिन योजना का पूरा लाभ लेने के लिए सही जानकारी के साथ समय पर पंजीकरण, दस्तावेजों की पूर्णता और शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी बेहद आवश्यक है।

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