देश में 9 करोड़ हेक्टेयर से अधिक हुई बोनी

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09 अगस्त 2022, नई दिल्ली: देश में 9 करोड़ हेक्टेयर से अधिक हुई बोनी – देश में खरीफ फसलों की बुवाई गत वर्ष की तुलना में धीमी गति से चल रही है। 5 अगस्त तक 908.61 लाख हेक्टेयर में बोनी हो गई है, जबकि गत वर्ष इस अवधि में 936.65 लाख हेक्टेयर में बोनी हो गई थी। मोटे अनाज एवं एवं तिलहनों की बोनी अधिक क्षेत्र में हुई। जबकि धान सहित दलहन की बुवाई कम क्षेत्र में हुई है। अब तक लगभग 274.30 लाख हेक्टेयर में धान बोई गई है, जबकि गत वर्ष समान अवधि में 314.14 लाख
हेक्टेयर में बोनी हुई थी।

दलहन : कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दलहन का रकबा अभी तक 116.45 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो समान अवधि में 119.43 लाख हेक्टेयर था। इसके तहत अरहर 39.80 लाख हेक्टेयर में बोई गई है जबकि गत वर्ष समान अवधि में 44.43 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी। इसी प्रकार उड़द की बोनी 31.83 लाख हेक्टेयर में हुई है जो गत वर्ष इस अवधि में 33.87 लाख हेक्टेयर थी।

तिलहन : तिलहन का कुल रकबा 174.79 लाख हेक्टेयर हो गया है जो गत वर्ष अब तक 173.82 लाख हेक्टेयर था। इसके तहत सोयाबीन की बोनी अब तक गत वर्ष के 115.10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 117.51 लाख हेक्टेयर में बोई गई है। वहीं मूंगफली की बोनी 44.39 लाख के मुकाबले अब तक 41.09 लाख हेक्टेयर में हुई है।

मोटे अनाज : अब तक मोटे अनाज की बोनी 160.37 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि गत वर्ष इस अवधि 154.40 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इसमें बाजरा की बोनी 65.17 लाख हेक्टेयर में हो गई है, जबकि गत वर्ष इस अवधि में 56.68 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी। देश में कपास का रकबा 121.12 लाख हेक्टेयर में हो गया है। जो गत वर्ष से 7 लाख हेक्टेयर अधिक है। गत वर्ष समान अवधि में 113.50 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी। वहीं गन्ने की बोनी 54.67 लाख हेक्टेयर में हुई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 54.42 लाख हेक्टेयर में गन्ना बोया गया था।

देश में प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई
इकाई : लाख हे. में (5 अगस्त 2022 की स्थिति)

फसल बुवाई बुवाई
 20222021
धान 274.3314.14
दलहन 116.45.119.43
मोटा अनाज 160.37154.4
मक्का 75.7576.34
बाजरा 65.1756.68
तिलहन 174.79173.82
मूंगफली 41.0944.39
सोयाबीन 117.51115.1
कपास  121.12113.5
कुल 908.61936.65
   
देश में 9 करोड़ हेक्टेयर से अधिक हुई बोनी

नोट : कुल क्षेत्रफल के आंकड़े चार्ट से अलग हंै, क्योंकि सभी फसलों को चार्ट में शामिल नहीं किया गया है। ोत : कृषि मंत्रालय

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