राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मानसून दो दिन पहले पहुंचा केरल; जानें इस साल की बारिश का खेती पर प्रभाव

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30 मई 2024, नई दिल्ली: मानसून दो दिन पहले पहुंचा केरल; जानें इस साल की बारिश का खेती पर प्रभाव – सामान्य तौर पर भारत में मानसून की आमद जून के शुरुवाती दिनों में होती है परन्तु इस वर्ष मानसून 30 मई को केरल और अधिकांश पूर्वोत्तर भारत में पहुंच चुका है, जो सामान्य तिथि से 2 दिन पहले है। यह समाचार किसानों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी फसल बुवाई और जल संसाधन प्रबंधन की योजना को प्रभावित करेगा।

IMD के अनुसार, 2024 के मानसून के दौरान देशभर में औसत से 106% अधिक वर्षा होने की संभावना है, जो   4% कम ज्यादा हो सकती है। इसका मतलब है कि इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश होगी। क्षेत्रवार वर्षा के पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 106% से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य वर्षा (92-108%) और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से कम वर्षा (<94%) की संभावना है। मानसून कोर ज़ोन, जो देश के अधिकांश वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्र को कवर करता है, वहाँ भी 106% से अधिक वर्षा होने की संभावना है।

कृषि पर प्रभाव

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के अनुसार, मानसून का आगमन और उसकी प्रगति केरल में 1 जून से शुरू होती है। इसके बाद, पश्चिमी तट के राज्यों (महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात) में धीरे-धीरे मानसून आगे बढ़ता है। पूर्वोत्तर भारत में मानसून जून के पहले सप्ताह में प्रवेश करता है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की प्रगति जून के अंत तक होती है, जिसमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली शामिल होते हैं। मध्य और पूर्वी भारत में मानसून जून के मध्य से अंत तक फैलता है, जिसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे इस पूर्वानुमान के आधार पर अपनी फसल बुवाई की योजना बनाएं और जल संसाधनों का प्रबंधन करें। उन्हें IMD द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों का पालन करना चाहिए ताकि वे संभावित समस्याओं, जैसे बाढ़ और लू, से निपटने के लिए तैयार रह सकें। IMD की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जो खेती के लिए लाभदायक हो सकती है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और लू जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। अतः किसानों और संबंधित अधिकारियों को तैयारी करने और आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी जाती है।

मानसून के आगमन का विस्तार

30 मई 2024 को केरल और अधिकांश पूर्वोत्तर भारत में मानसून का आगमन हो गया है। इसमें नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और असम शामिल हैं। सामान्यतः, दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून को केरल में प्रवेश करता है और 5 जून तक अधिकांश पूर्वोत्तर भारत में फैल जाता है। इस वर्ष यह 2 दिन पहले केरल और 6 दिन पहले पूर्वोत्तर भारत में पहुंचा है।

एल नीनो और ला नीना का प्रभाव

समुद्री सतह तापमान में बदलाव के अनुसार, प्रशांत महासागर में पहले देखी गई मजबूत एल नीनो की स्थितियाँ अब कमजोर हो रही हैं। एल नीनो की स्थिति में प्रशांत महासागर गर्म हो जाता है, जिससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है और कम बारिश होती है। मानसून के बाद के हिस्से में ला नीना की स्थितियाँ विकसित हो सकती हैं। इस स्थिति में प्रशांत महासागर ठंडा होता है, जिससे भारत में मानसून मजबूत हो सकता है और अधिक बारिश होती है।

जून 2024 के पूर्वानुमान अनुसार क्षेत्रवार वर्षा

जून 2024 के मासिक पूर्वानुमान में देशभर में सामान्य वर्षा (92-108%) की संभावना जताई गई है। दक्षिण प्रायद्वीप और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम तापमान हो सकता है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक हो सकती है

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