हेमलता ने उगाई चटख लाल स्ट्राबेरी

Share this

मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर महेश्वर से लगभग 10 किमी दूर पहाड़ी अंचल ग्राम नजरपुर में इन दिनों हेमलता खराड़े के खेत में स्ट्रॉबेरी की बहार आई है। वर्षों से खेती करने वाली हेमलता ने पहली बार अपने खेत में प्रयोग के तौर पर स्ट्रॉबेरी लगाना पसंद किया। हेमलता ने स्ट्रॉबैरी की खेती करने वाले पन्नालाल सोलंकी के स्टॉल से 1 पैकेट खरीदा। जब पहली बार स्ट्रॉबेरी चखा, तो वो भी मुरीद हो गई। अब हेमलता ने भी तय किया कि क्यों न मैं भी इसकी खेती कंरू? उसके बाद से स्ट्रॉबेरी की जानकारी लेने के लिए लगातार कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से संपर्क किया। आत्मा परियोजना ने नवाचार के तहत हेमलता खराड़े को अक्टूबर में स्ट्रॉबेरी के 2 हजार पौधे दिए।

गिलहरी भगाने का आईडिया

gilhariनजरपुर पहाड़ी अंचल में बसा है। हेमलता ने बताया कि एक ही समस्या है, गिलहरी अपने कुनबे के साथ स्ट्रॉबेरी खाकर खराब कर दिया करती है। इससे निजात पाने के लिए पुत्र संजय ने दो बाटलों के साथ पत्थर को एक लंबी डोर से घर बैठे-बैठे नियंत्रित करने की युक्ति निकाली है। घर बैठे-बैठे उस डोर को खींचने से बोतलें आपस में टकराती हैं। इस आवाज से गिलहरी भागती है। जनवरी माह के पहले सप्ताह से खेत में स्ट्रॉबैरी आना शुरू हुई। अब तक 10 बार स्ट्रॉबेरी की तुड़ाई की है। इस दौरान लगभग डेढ़ क्विंटल स्ट्रॉबैरी की फसल ले चुकी है। फल बेचने के लिए हेमलता अपने परिवार के बच्चों के साथ ढाई सौ- ढाई सौ ग्राम के पैकेट बनाती है। महेश्वर चूंकि पर्यटन की दृष्टि से एक अच्छा स्थल है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटक स्ट्रॉबेरी भी खाना पसंद करते है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो जाता है।

Share this
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *