कृषि अवसंरचना कोष योजना में मध्य प्रदेश और आंध्रप्रदेश टॉप पर

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  • श्री सैमुअल प्रवीण कुमार, संयुक्त सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली
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श्री सैमुअल प्रवीण कुमार, संयुक्त सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली

7 जून 2022, नई दिल्ली: भारतीय कृषि में एक नये अध्याय की शुरूआत हो चुकी है। जहां एक ओर भारतीय कृषि, डिजीटलाईजेशन की तरफ आगे बढ़ी है वहीं दूसरी ओर पीएम किसान योजना, कृषि अवसंरचना कोष योजना और किसान उत्पादक संगठन, स्टार्टअप, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आदि के क्रियान्वयन से भारतीय कृषि को एक नई ऊंचाई मिली है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान को सरकार स्वीकार करती है और उसके विकास की यात्रा को तेज करने के लिए कृतसंकल्पित है। इसी का परिणाम है कि विगत 8 वर्षों में खाद्यान्न व बागवानी फसलों के उत्पादन में हम विश्व में श्रेष्ठ रहे हैं।

सरकार लगातार नई-नई योजनाओं को बनाने और उनके बेहतर क्रियान्वयन के प्रति ईमानदार रही, परिणामस्वरूप लगातार खाद्यान्न उत्पादन बढ़ता गया है। बजटीय आवंटन का लगातार बढऩा भी सरकार की नेक नीयत और ईमानदार सोच का परिणाम है। सरकार ने मंत्रालय के प्रयास से जिन नई योजनाओं को किसानों को समर्पित किया है, उन योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य सरकारों की भूमिका को भी याद रखा जायेगा। किसी भी योजना की सफलता उस योजना की क्रियान्वयन, निगरानी, समीक्षा, मूल्यांकन और आ रही चुनौतियों के समाधान के बाद ही होती है। इन सभी बिन्दुओं पर मंत्रालय एवं सरकार ने विगत 8 वर्षों में विशेष ध्यान दिया है।

  • मध्य प्रदेश, आन्ध्रप्रदेश बने अन्य राज्यों के लिए मॉडल।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम् योगदान।
  • कृषि अवसंरचना कोष के तहत 21600 आवेदन पोर्टल पर, 12504 परियोजनाएं स्वीकृत।
  • मध्य प्रदेश में अब तक 1488 करोड़ आवंटित जबकि 2678 करोड़ खर्च किए।
  • कृषि अवसंरचना कोष योजना से किसानों की बढ़ेगी आय।

कृषि विकास और उत्पादन की गतिशीलता को अगले चरण तक ले जाने के लिए बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अनुभव किया और सरकार से अपनी मंशा बताते हुए कृषि अवसंरचना कोष योजना की रूपरेखा रखी जिसे सरकार ने किसान हितैषी,सकारात्मक पहल और ईमानदार सोच के साथ अपनी मंजूरी दी। ये योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने तथा उनकी कृषि उत्पादन बेचने की स्वतंत्रता की स्वायत्तता के लिए उन्हें दी गई हैं।

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आंकड़े बताते हैं कि अभी तक कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत 21600 आवेदन पत्र पोर्टल पर उपलब्ध हैं। 20 मई, 2022 तक करीब 12504 परियोजनायें स्वीकृत हो चुकी हैं और इन योजनाओं में लगभग 15599 करोड़ रूपये निवेश होगा। इसके लिए 9129 करोड़ रूपये स्वीकृत हो चुके हैं और इस योजना के अंतर्गत 4890 करोड़ रूपये जारी भी किये जा चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि स्वीकृत की गई राशि में सहकारी बैंकों द्वारा 33.7 प्रतिशत और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा 66.3 प्रतिशत राशि की स्वीकृति दी जा चुकी है। अगर राज्यवार इस योजना के तहत स्वीकृति राशि की बात करें तो ग्राफ बताते हैं कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पूरी स्वीकृत राशि का तीस प्रतिशत भाग स्वीकृत किया गया, वहीं आंध्र प्रदेश सरकार 19 प्रतिशत की भागीदारी के साथ द्वितीय स्थान पर है। इन प्रदेशों में इस योजना के सफल क्रियान्वयन का यह उदाहरण है।

यह बात चौंकाती है कि देश में 11763 सत्यापित वाणिज्यिक बैंकों के आवेदनों में 58 प्रतिशत आवेदन पत्र मात्र मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से हैं। राज्यवार अवसंरचना निर्माण के रूझान मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश को सभी राज्यों से आगे बनाये हुए हैं जो योजना की प्रगति का परिचायक है। मध्य प्रदेश को अब तक 1488 करोड़ रूपये आवंटित किया गया जबकि उनकी उपलब्धि 2678 करोड़ रूपये की परियोजनाओं की है। इसी प्रकार आंध्र प्रदेश भी 1308 करोड़ रूपये के एवज 1715 करोड़ रूपये खर्च करके दूसरे स्थान पर बना है।

मध्य प्रदेश अभी तक पूरे देश से प्राप्त आवेदन पत्रों में 38 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सर्वश्रेष्ठ बना हुआ है और उसी के अनुपात में 30 प्रतिशत पूरे बजटीय आवंटन का हिस्सा उसे मिला है। जो कि योजना की मध्य प्रदेश में अभूतपूर्व सफलता की कहानी कहता है।

आंध्र प्रदेश की सफलता की कहानी बताते हुए मुझे पहले यह बताना है कि यहां पर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों से 1367 आवेदन पत्र के लिए 1519 करोड़ स्वीकृत हुए जिससे राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के लिए फार्म गेट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों के लिए राज्य सरकार का सहयोग सराहनीय रहा और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के पास पर्याप्त मार्जिन मनी न होने पर राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराना प्रशंसनीय कार्य रहा है। कृषि अवसंरचना विकास के लिए भूमि की व्यवस्था सरकार द्वारा किया जाना वांछित था। योजना की सफलता के लिए राज्य सरकार का सहयोग अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है। आंध्र प्रदेश राज्य के किसानों को संकटकालीन बिक्री से बचाने और प्रत्येक किसानों लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए भंडारण व्यवस्था उपलब्ध कराकर ई-मार्केटिंग प्लेटफार्म द्वारा देशभर के व्यापारियों से जोड़ा गया। ये प्रयास मूल्यवर्धन के दिशा में रचनात्मक एवं सराहनीय है।

मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश का उदाहरण अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में है और सभी राज्य सरकारों को किसान हितैषी इस योजना के लिए आगे आने के लिए प्रेरणा देता है। 

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