राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

AI मॉनसून पूर्वानुमान का असर: किसानों ने बदली रोपाई रणनीति, 13 राज्यों में बढ़ी फसल उत्पादकता

07 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: AI मॉनसून पूर्वानुमान का असर: किसानों ने बदली रोपाई रणनीति, 13 राज्यों में बढ़ी फसल उत्पादकता – देश में खेती-किसानी पर आधुनिक तकनीक का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसका ताज़ा उदाहरण खरीफ सीजन 2025 के दौरान देखने को मिला, जब 13 राज्यों के किसानों ने एआई आधारित मॉनसून पूर्वानुमान का उपयोग करके अपनी रोपाई रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में बताया कि एआई पूर्वानुमानों की सहायता से किसानों को स्थानीय स्तर पर मॉनसून के आगमन की सही जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्होंने मौसम के अनुरूप खेती का निर्णय लिया।

इस एआई-आधारित पायलट प्रोजेक्ट के तहत एम-किसान पोर्टल के माध्यम से किसानों को हिंदी, ओडिया, मराठी, पंजाबी और बांग्ला भाषाओं में एसएमएस भेजे गए। इन संदेशों में मॉनसून की स्थानीय शुरुआत का अनुमान था, जो बुवाई की तारीख तय करने का सबसे अहम कारक माना जाता है। कुल 3.88 करोड़ से अधिक किसानों को यह जानकारी उपलब्ध कराई गई।

52% किसानों ने एआई अलर्ट के आधार पर की खेती  

मध्य प्रदेश और बिहार में पूर्वानुमान संदेश भेजे जाने के बाद कॉल सेंटरों के माध्यम से किसानों से टेलीफोनिक सर्वे भी किए गए। इसमें सामने आया कि 31% से 52% किसानों ने एआई अलर्ट के आधार पर अपनी भूमि की तैयारी, बुवाई के समय, फसल चयन और इनपुट उपयोग में बदलाव किए। इन बदलावों का सकारात्मक असर फसल उत्पादकता पर भी देखा गया।

एआई मॉडल 125 साल के ऐतिहासिक बारिश डेटा पर आधारित

सरकार द्वारा उपयोग किए गए इस एआई-आधारित पूर्वानुमान सिस्टम को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और डेवलपमेंट इनोवेशन लैब-इंडिया ने मिलकर विकसित किया है। यह मॉडल पूरी तरह ओपन-सोर्स है और इसमें IMD के 125 वर्षों के ऐतिहासिक वर्षा डेटा, न्यूरलजीसीएम और ECMWF के एआई फोरकास्टिंग सिस्टम को मिलाया गया। इस मिश्रित मॉडल ने स्थानीय मॉनसून के आगमन का अधिक सटीक अनुमान प्रदान किया, जिससे किसानों को पूर्व तैयारी का पर्याप्त समय मिला।

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‘किसान ई-मित्र’ और कीट पहचान तकनीक से भी बढ़ा फायदा

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में एआई का व्यापक उपयोग कर रही है। ‘किसान ई-मित्र’ नामक वॉयस-आधारित एआई चैटबॉट किसानों के सवालों के त्वरित समाधान में बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह चैटबॉट 11 भाषाओं में सेवाएं देता है और अब तक 93 लाख से अधिक प्रश्नों के उत्तर दे चुका है। प्रतिदिन करीब 8,000 किसान इसका उपयोग कर रहे हैं।

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इसके साथ ही, फसलों में कीटों के संक्रमण की पहचान के लिए राष्ट्रीय कीट निगरानी तकनीक भी एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से काम कर रही है। यह तकनीक किसानों को कीटों की तस्वीर लेने और तुरंत पहचान करने में मदद करती है। वर्तमान में 10,000 से अधिक कृषि कार्यकर्ता इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं, जो 66 फसलों और 432 से अधिक कीटों की पहचान करने में सक्षम है। इससे फसल नुकसान कम हुआ और उत्पादकता में सुधार देखने को मिला।

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