एनडीडीबी आनंद में भेड़, बकरी, ऊंट एवं अन्य गैर-बोवाइन दूध पर आईडीएफ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
15 फरवरी 2026, नई दिल्ली: एनडीडीबी आनंद में भेड़, बकरी, ऊंट एवं अन्य गैर-बोवाइन दूध पर आईडीएफ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न – भारतीय राष्ट्रीय समिति, इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (INC-IDF) द्वारा आयोजित भेड़, बकरी, ऊंट एवं अन्य गैर-बोवाइन दूध पर 9वीं इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (IDF) संगोष्ठी 9 से 11 फरवरी 2026 तक राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), आनंद में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में वैश्विक विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और डेयरी क्षेत्र के पेशेवरों ने गैर-बोवाइन डेयरी क्षेत्र के नवाचार, स्थिरता और भविष्य पर विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र में आईडीएफ के अध्यक्ष श्री गिल्स फ्रॉमेंट, एनडीडीबी के अध्यक्ष एवं आईडीएफ बोर्ड सदस्य तथा आईएनसी-आईडीएफ के सचिव डॉ. मीनिश शाह, भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा, भारत में एफएओ के प्रतिनिधि श्री तकायुकी हागीवारा तथा आईडीएफ की महानिदेशक सुश्री लॉरेंस रिकेन सहित आईडीएफ बोर्ड सदस्य, शिक्षाविद, दूध उत्पादक, प्रोसेसर, नीति-निर्माता और डेयरी क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
इस संगोष्ठी में 90 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत सात तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उभरते बाजार और उपभोक्ता रुझान, लघु किसानों का सशक्तिकरण एवं गैर-बोवाइन डेयरी का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, संसाधन अनुकूलन और स्थिरता के लिए फार्म प्रबंधन रणनीतियां, गैर-बोवाइन दूध की प्रोसेसिंग तकनीक, गुणवत्ता और नवाचार, पोषण एवं जैव-कार्यात्मक विशेषताओं वाले डेयरी उत्पादों का विकास, जैव-सुरक्षा एवं रोग प्रबंधन, तथा गैर-बोवाइन दूध से जुड़े वैश्विक मानक और नीतियां जैसे विषय शामिल रहे। इस दौरान गैर-बोवाइन दूध से संबंधित पोस्टर प्रदर्शित किए गए और प्रदर्शकों ने अपनी नवीन तकनीकों, सेवाओं और उत्पादों का प्रदर्शन किया।
आईडीएफ के अध्यक्ष श्री गिल्स फ्रॉमेंट ने अपने संबोधन में कहा कि बकरी, भेड़ और ऊंट का दूध कठोर जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए टिकाऊ डेयरी विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने क्षेत्र के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताओं—पर्यावरण, पशु कल्याण, पोषण, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और समावेशन—पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वैश्विक दूध उत्पादन एक अरब टन से अधिक हो चुका है, लेकिन इसकी वृद्धि असमान है। भारत की वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने खाद्य सुरक्षा मानकों, नवाचार और मजबूत पोषण संबंधी आंकड़ों के माध्यम से गैर-बोवाइन डेयरी क्षेत्र के विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने एफएओ के 2026 के “इंटरनेशनल ईयर ऑफ रेंजलैंड्स एंड पास्टोरलिस्ट्स” के संदर्भ में जलवायु-लचीली प्रथाओं और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
डॉ. मीनिश शाह ने गैर-बोवाइन दूध के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे जलवायु-लचीला, पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण और अक्सर महिला किसानों द्वारा संचालित बताया। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से भारत के डेयरी क्षेत्र की कमी से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने सहकारी मॉडल और नेशनल डेयरी प्लान जैसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र के निरंतर विकास पर जोर दिया। उन्होंने एनडीडीबी की विभिन्न पहलों का उल्लेख किया, जिनमें फुट-एंड-माउथ रोग और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ निःशुल्क टीकाकरण वाला पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम, रोग प्रबंधन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तथा जीनोमिक तकनीकों जैसे उन्नत प्रजनन उपाय शामिल हैं। उन्होंने बकरी कृत्रिम गर्भाधान में प्रगति और अमूल की सरहद डेयरी के माध्यम से ऊंट दूध के विपणन का उल्लेख करते हुए ऐसे मॉडलों को बड़े स्तर पर अपनाने का आह्वान किया, ताकि किसानों को उपभोक्ता बाजार से अधिक लाभ मिल सके।
डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वर्ष 2026 को “इंटरनेशनल ईयर ऑफ ग्रेजिंग लैंड्स एंड पास्टोरलिस्ट्स” के संदर्भ में इस संगोष्ठी की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत की टिकाऊ खाद्य खपत प्रणाली और पशु प्रोटीन के विविध स्रोतों की बढ़ती मांग का उल्लेख किया। उन्होंने गैर-बोवाइन दूध को पोषक तत्वों से भरपूर, जलवायु-अनुकूल और जैविक व मुक्त चराई प्रणाली से उत्पादित उत्पाद के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने भेड़, बकरी और ऊंट आधारित मूल्य श्रृंखलाओं को कम-कार्बन उत्पादन प्रणाली बताया और उन्नत प्रोसेसिंग तकनीकों, प्रमाणन प्रणाली, ट्रेसबिलिटी तथा क्लस्टर आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत में एफएओ के प्रतिनिधि श्री तकायुकी हागीवारा ने भारत के डेयरी क्षेत्र के भविष्य में ऊंट, बकरी और भेड़ के दूध के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, विपणन और बकरी पनीर जैसे उत्पादों के प्रचार पर जोर दिया। राजस्थान और कच्छ के अनुभवों, विशेष रूप से सरहद डेयरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऊंट दूध के पोषण मूल्य की बढ़ती पहचान की बात कही और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता बताई। उन्होंने एनडीडीबी और भारत सरकार के साथ मिलकर पशुपालकों की आजीविका सुधारने और गैर-बोवाइन डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए एफएओ की प्रतिबद्धता दोहराई।
आईडीएफ की महानिदेशक सुश्री लॉरेंस रिकेन ने भारतीय राष्ट्रीय समिति और एनडीडीबी को इस आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए विज्ञान-आधारित और समावेशी डेयरी विकास में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और बदलती उपभोक्ता अपेक्षाएं डेयरी क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं, जिससे भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में गैर-बोवाइन दूध का महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की विविध डेयरी प्रणाली और महिला भागीदारी की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए मूल्य श्रृंखला की चुनौतियों को दूर करने, स्थिरता को मजबूत करने और वैश्विक सहयोग बढ़ाने के लिए डेटा-आधारित व्यावहारिक रणनीतियों पर जोर दिया।
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