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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ग्रामीण क्रेडिट स्कोर: गांवों में वित्तीय आजादी की पहली सीढ़ी!

22 मार्च 2025, नई दिल्ली: ग्रामीण क्रेडिट स्कोर: गांवों में वित्तीय आजादी की पहली सीढ़ी! – केंद्र सरकार के 2025-26 के बजट में भारत की ग्रामीण आबादी के लिए वित्तीय पहुंच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल की शुरुआत की गई है—ग्रामीण क्रेडिट स्कोर। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा विकसित की जाने वाली यह नवीन प्रणाली, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण उधारकर्ताओं, जैसे किसानों और हाशिए पर रहने वाली समुदायों के लिए क्रेडिट मूल्यांकन में क्रांति लाने के लिए तैयार है।

लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करना

वर्तमान में, क्रेडिट सूचना कंपनियां (सीआईसी) एक सामान्य क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम का उपयोग करती हैं, जो शहरी और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के लिए बनाया गया है, जिसमें ग्रामीण भारत की अनूठी वित्तीय परिस्थितियों पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। इस कमी के कारण ग्रामीण उधारकर्ताओं को पर्याप्त ऋण सुविधा नहीं मिल पाती, जिनके पास औपचारिक वित्तीय रिकॉर्ड तो नहीं होते, लेकिन जो कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

प्रस्तावित ग्रामीण क्रेडिट स्कोर ग्रामीण आजीविका की वास्तविकताओं के अनुरूप क्रेडिट मूल्यांकन मानदंड तैयार करेगा, जिससे एसएचजी, छोटे किसान और ग्रामीण उद्यमी अपनी साख का निष्पक्ष मूल्यांकन प्राप्त कर सकें। ऐसा करके यह पहल ग्रामीण आर्थिक विकास को बाधित करने वाली वित्तीय खाई को कम करने की उम्मीद करती है।

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ग्रामीण ऋण तक पहुंच में बढ़ोतरी

बेहतर क्रेडिट मूल्यांकन तंत्र के साथ, ग्रामीण क्रेडिट स्कोर औपचारिक ऋण तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा, जिससे अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भरता कम होगी, जो बेहद ऊंची ब्याज दरें वसूलते हैं। यह विशेष रूप से उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें बीज, उर्वरक और मशीनरी खरीदने के लिए समय पर ऋण की जरूरत होती है, साथ ही उन एसएचजी के लिए भी जो विभिन्न आय-सृजन गतिविधियों में लगे हैं।

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एक अच्छी तरह से संरचित क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम ग्रामीण उधारकर्ताओं के लिए तेजी से ऋण स्वीकृति और कम ब्याज दरों को संभव बना सकता है, क्योंकि वित्तीय संस्थानों को उनकी ऋण चुकाने की क्षमता की स्पष्ट जानकारी होगी। इसके अलावा, यह पहल महिलाओं के नेतृत्व वाले एसएचजी को सशक्त बनाएगी, जिससे उनकी ऋण प्राप्त करने और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अपने उद्यमों को बढ़ाने की क्षमता बढ़ेगी।

सरकार के अगले कदम

भारत सरकार वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ग्रामीण वित्तीय संस्थानों जैसे प्रमुख हितधारकों के साथ परामर्श करके ग्रामीण क्रेडिट स्कोर की रूपरेखा और ढांचे पर काम कर रही है। इसका लक्ष्य एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है जो ग्रामीण उधारकर्ताओं के वित्तीय व्यवहार और चुकौती पैटर्न को सटीक रूप से दर्शाए, जिससे उनकी आर्थिक मजबूती बढ़े।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने हाल ही में लोकसभा में इस विकास के बारे में जानकारी दी, जिसमें सरकार की समावेशी वित्तीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।

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