राज्य मंडियों को खत्म करें

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केन्द्रीय वित्त मंत्री की नसीहत

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गत दिनों कहा कि राज्यों को कृषि उपज मंडियों (एपीएमसी) को छोड़ कर इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिल सके। उन्होंने यहां राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्र सरकार ई-नाम को बढ़ावा दे रही है और कई राज्य सरकारें इसे अपने स्तर पर बढ़ावा देने को सहमत है। 

उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि राज्य एपीएमसी को छोड़ें। इसमें कोई शक नहीं कि एक समय पर एपीएमसी ने अपनी भूमिका अच्छे से निभाई थी। लेकिन आज मंडियों के साथ कई सारी दिक्कतें जुड़ी हैं, हर राज्य में ये मंडियां इतनी प्रभावी नहीं रह गई हैं कि किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने में मददगार साबित हो सकें।’

उन्होंने कहा, ‘हम राज्यों से बातें कर रहे हैं कि वे एपीएमसी को भंग कर किसानों के लिए ई-नाम अपनाएं।’

ई-नाम का हाल -बेहाल

इस समय देश में आठ राज्यों की 21 ई – नाम ने कृषि जिंसों की इलेक्ट्रॉनिक मंच पर अंतर्राज्यीय व्यापार की सुविधा प्रदान करने के लिए आपस में हाथ मिलाया है। इन राज्यों में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की ई-नाम शामिल है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने अप्रैल 2016 से राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना (ई-नाम) योजना मंडियों में क्रांति लाने की उम्मीद से प्रारंभ की थी परन्तु इसके क्रियान्वयन की धीमी गति ने तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी निराश किया है। किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य की जानकारी नहीं मिल पा रही है। देश की 2700 कृषि उपज मंडियों में से पहले चरण में 585 कृषि उपज मंडियों को ई-नाम योजना से जोड़ा गया है। सरकार की मंशा है कि देश में किसानों को एक क्लिक पर सभी राज्यों के मंडियों की जानकारी मिले जिससे किसान अधिक मूल्य पर उपज बेचकर अपनी आमदनी दोगुनी कर सकें।

इसी तारतम्य में म.प्र. की 58, राजस्थान की 25, छत्तीसगढ़ की 14, उ.प्र. की 100, महाराष्ट्र की 60 एवं गुजरात की 79 मंडियों को ई-नाम योजना से जोड़ा गया है। इसमें से म.प्र. की 35, राजस्थान की 20 एवं छत्तीसगढ़ की 8 मंडियों में ई-ट्रेडिंग की शुरूआत की गई है। प्रारंभ में राज्य के किसानों से ऑनलाईन ट्रेडिंग की जा रही है इसमें म.प्र. से धान बासमती, मक्का, बाजरा, धान आई-आर-64, छत्तीसगढ़ से धान आईआर-64, धान एचएमटी, धान एमटीयू -1010 धान एवं राजस्थान से मूंगफली, सोयाबीन एवं मूंग की आवक हो रही है तथा ट्रेडिंग की जा रही है। राज्य के किसानों को फसल के बाजार भाव की जानकारी मिल रही है। अब अंतराष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय व्यापार की सुविधा के लिए ई-नाम पोर्टल से जुड़कर समझौता जरूरी है।

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